CG News: मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध विराम के बाद एक बार फिर दोनों तरफ से हमले शुरू हो गए हैं. मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध का असर समुद्री मार्गों पर भी हो रहा है. खासतौर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत होने लगी है. इस बीच रायपुर का एक युवक भी युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गया. मर्चेंट नेवी में काम करने वाले रुद्रांश चौबे लगभग 3 महीनों तक मिसाइलों और ड्रोन के खौफ के साए में गुजारने के बाद सही सलामत अपने घर वापस पहुंच गए हैं. जिसके बाद घरवालों ने उनका स्वागत किया. रायपुर पहुंचने के बाद उन्होंने पूरी आपबीती सुनाई.
‘घरवालों को नहीं बताते थे पूरी बात’
रुद्रांश मर्चेंट नेवी में काम करते हैं. वे एक व्यापारिक जहाज पर तैनात थे. रुद्रांश का अपने 22 क्रू मेंबर्स के साथ वापस भारत लौट रहे थे. उनका जहाज 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया लेकर आ रहा था. लेकिन तभी ईरान-अमेरिका के युद्ध में उनका जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गया.
रुद्रांश बताते हैं कि हर तरफ ड्रोन और मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थीं. कभी-कभी लगता था कि शायद सुरक्षित घर वापस नहीं पहुंच पाएंगे. हालांकि इस दौरान घरवालों से बात होती रहती थी और लगातार संपर्क में बने हुए थे. हम सब खौफजदा थे कि कहीं किसी दिन किसी मिसाइल या ड्रोन का शिकार हमारा जहाज ना हो जाए. लेकिन घरवालों को पूरी बात नहीं बताते थे. टीवी और समाचारों के जरिए खबर पाकर वे पहले से चिंतित थे. अगर घरवालों को सही बात बता देते तो उनकी टेंशन और बढ़ जाती.
‘घरवाले सच्चाई सुनकर हैरान रह गए’
रुद्रांश चौबे ने बताया कि जब वह घर पहुंचे तो घरवालों ने उनका जोरदार स्वागत किया. हालांकि घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने सफर की सारी सच्चाई घरवालों को बता दी. उन्होंने बताया कि कैसे 90 दिन मौत के साए में गुजारे. घरवालों को बताया कि आसपास से गुजरने वाली मिसाइल की आवाज के साथ दिल सहम जाता था. कॉल पर तो सब कुछ ठीक होने की बात कहते थे, लेकिन अंदर ही अंदर जहाज पर मौजूद सभी लोगों को खतरे का अंदाजा था. रुद्रांश की आपबीती सुनकर उनके घरवाले भी डर गए और उन्हें जिंदगी में दोबारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ना जाने के लिए कहा है.
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