रायपुर। छत्तीसगढ़ में अडानी के स्मार्ट मीटर ने अपना मायाजाल बिछाने के बाद लोगों को रूलाने का काम शुरू कर दिया है। राज्य में पीडीसीएल कंपनी के माध्यम से अब तक लाखों स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। यूपी जैसे राज्य में इसे लगाने पर रोक के बाद वहां पर इसे नहीं लगाया जा रहा। वहीं तेलंगाना राज्य ने तो अडानी के 20 हजार करोड़ के स्मार्ट मीटर टेंडर को ही इंकार कर दिया है।
ऐसे में पीडीसीएल छत्तीसगढ़ के कर्ताधर्ता और बड़े अधिकारियों ने भाजपा और मोदी के दबाव में इसे आनन-फानन में लगाने के आदेश दिए। अब लोगों को रीडिंग का बिल कम और वास्तविकता में अधिक बिल का दंश झेलना पड़ रहा है। अफसरों का कहना है कि गर्मी के समय में बिजली का लोड़ बड़ने के कारण बिलों में गड़बड़ी हुई है।
बिजली बिल में भारी भ्रष्टाचार और आम जनता को गुमराह कर स्मार्ट तरीके से लूट रही है। बिजली उपभोक्ताओं को बीते माह की रीडिंग बिल दिया गया है उसकी भुगतान राशि 910 रुपए है, लेकिन उपभोक्ता बिल भुगतान करने गया तो 1700 रुपए का बिल भुगतान लिया जा रहा है। जो उपभोक्ता बिजली बिल भुगतान मोर बिजली ऐप से ऑनलाइन करते है उन्हें घर में पहुँची हुई रीडिंग बिल 2880 रुपए मिला। मोर बिजली एप में ऑनलाइन बिल पेमेंट की राशि 4440 रुपए का भुगतान बकाया दिखाया जा रहा है।
एक उपभोक्ता को 2980 रु का बिल दिया गया लेकिन जब भुगतान करने पहुँचा तो 4740 रु मांगा गया। जबकि रीडिंग बिल एवं मोर एप में बिजली खपत बराबर है बस राशि में हजारों रुपया का अंतर है।
जनता पहले ही बिजली की महंगी दर, स्मार्ट मीटर के कारण अनाप शनाप बिजली बिल, लो वोल्टेज से परेशान है। अब बिजली कम्पनी दो तरह की बिल देकर जनता को गुमराह कर लूट रही है। पहले बिजली बिल हाफ योजना के तहत 400 यूनिट तक मिलने वाली छूट को खत्म किया गया अब बिजली बिल में लूट रहे है। पीडीसीएल के कर्ताधर्ता सहाब के आते ही जनता को जोर का झटका देकर अडानी के लूट वाली मीटर का रेग चमका रहे हैं।
पहले तो आईपीओ लाकर आडानी का रास्ता बिजली कंपनी के लिए खोला ही दिया। लगाता है कि खनिज, सीमेंट, पॉवर और अन्य क्षेत्रों में अपना रंग दिखाकर पूरे छत्तीसगढ़ में अडानी का कब्जा पीडीसीएल के कर्ताधर्ता सब कराना चाह रहे हैं।
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