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हाईकोर्ट ने नियुक्ति निरस्तीकरण को ठहराया सही, कोर्ट ने कहा- आरक्षण का लाभ सिर्फ मूल राज्य में मान्य, महिला की याचिका खारिज

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उसी राज्य में मिल सकता है, अभ्यर्थी जहां का मूल निवास है। कोर्ट ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के लिए निकली भर्ती प्रक्रिया के मामले में एक महिला की याचिका खारिज करते हुए कलेक्टर कोरिया के आदेश को सही ठहराया है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे के सिंगल बेंच में हुई।

क्या है मामला
दरअसल, कोरिया जिले में ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों’ (PVTG) के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती हुई थी। आवेदिका रामवती ने भृत्य पद के लिए आवेदन किया था। चयन के बाद उसे 8 अगस्त 2022 को नियुक्ति भी दे दी गई। हालांकि बाद में दस्तावेजों की जांच हुई, तो पता चला कि महिला मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की रहने वाली है और उसका जाति प्रमाण पत्र भी वहीं के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है।

इसे आधार बनाकर कलेक्टर कोरिया ने 27 अक्टूबर 2022 को उसकी नियुक्ति रद्द कर दी थी। कोरिया कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए रामवती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर लगाई। जिसमें कलेक्टर की कार्रवाई और आदेश पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि आदेश जारी करने से पहले कलेक्टर ने उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया है। यह प्राकृतिक न्याय सिद्धांत का सीधेतौर पर उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना था कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही उसकी नियुक्ति हुई थी, इसलिए उसे बहाल किया जाए।

कोर्ट का निर्णय
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आवेदिका एक जनजातीय समूह से ताल्लुक रखती है, लेकिन उसका जाति प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश का है, जिसे छत्तीसगढ़ में मान्य नहीं किया जा सकता। आरक्षण का लाभ केवल उसी राज्य में लिया जा सकता है, जहां संबंधित व्यक्ति का जन्म हुआ हो या वह मूल निवासी हो।

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