High Alert On Shiv Sena Foundation Day: महाराष्ट्र की राजनीति में आज उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के लिए बहुत बड़ा दिन है. ऐसा इसलिए क्योंकि बाला साहेब की बनाई शिवसेना आज यानी 19 जून को अपने 60 साल पूरे कर चुकी है. भले ही इस पार्टी में कई बार टूट हो चुकी है. लेकिन, तमाम गुट अपने आप को बाला साहेब का उत्तराधिकारी बताते हैं. इसके साथ ही यह दावा भी करते हैं कि हम ही उनकी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं.
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी के दोनों गुट एक बार फिर आमने-सामने नजर आएंगे. इस बार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के बीच मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि ताकत और जनसमर्थन के प्रदर्शन का भी होगा.
महाराष्ट्र में शक्ति प्रदर्शन की इस बार खास वजह ऑपरेशन टाइगर भी है. शिंदे ने साल में दूसरी बार उद्धव के गुट में तोड़फोड़ की है. यही वजह है कि दोनों ही गुट शक्ति प्रदर्शन में अपने आपको बड़ा साबित करने की कोशिश करेंगे. उद्धव गुट के छह बागी सांसदों का शिंदे सेना में शामिल होना अब सिर्फ औपचारिकता भर रह गया है.
दोनों गुटों ने की शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर दोनों गुट (उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे) ने अलग-अलग कार्यक्रम की तैयारी कर रखी है. लेकिन हालिया बगावत और नेताओं के तीखे बयानों के बाद स्थापना दिवस समारोह में बवाल का डर भी बना है. इसे लेकर मुंबई पुलिस ने अलर्ट जारी किया है. पुलिस ने गोरेगांव और सायन में होने वाले कार्यक्रमों में दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच विरोध-प्रदर्शन, जवाबी प्रदर्शन और टकराव की संभावना जताई है. यही वजह है कि पूरी मुंबई में सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए गए हैं.
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने जारी किया टीजर
स्थापना दिवस के दिन एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना की तरफ से एक टीजर भी जारी किया गया है. इसमें बाला साहेब ठाकरे के पुराने बयान शामिल हैं. जिसमें कहा गया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ही असली शिवसेना है, जहां न कोई मालिक है और न कोई नौकर, सभी सिर्फ कार्यकर्ता हैं की बात दोहराई गई.
60 साल में 6 बार टूटी शिवसेना
बाला साहेब ठाकरे ने जिस शिवसेना को 60 साल पहले बनाया था, वह अब तक 6 बार टूट चुकी है. बाल ठाकरे के रहते सबसे पहला विद्रोह छगन भुजबल ने 1991 में किया था. दूसरी बार विद्रोह साल 1999 में किया गया. उस समय यह विद्रोह गणेश नाइक ने किया था. 2005 में तीसरी बगावत करने वाले नारायण राणे रहे, जो कांग्रेस होते हुए अब बीजेपी में हैं. 2006 में बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे की भी पार्टी से विदाई हो गई. शिवसेना को सबसे बड़ा और घातक झटका 2022 में एकनाथ शिंदे से लगा. इसके साथ ही ताजी टूट जून 2026 में हुई है. जब 6 सांसदों ने शिंदे गुट का दामन थाम लिया है.
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter