अब बिजली का झटका, देकर अपनी जीत का जश्न मना रहे सहाब

भाजपा सरकार बनने के बाद पांचवीं बार बिजली के दरों में वृद्धि की गई है। फिर एक बार घरेलू उपभोक्ताओं पर अधिक और गैर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम भार डाला गया है। घरेलू उपभोक्ताओं के विद्युत दर को 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। गैर घरेलू उपभोक्ताओं के विद्युत दरों में 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है.

वैसे पीडीसीएल संभाल रहे सहाब ने छत्तीसगढ़ आते ही सबसे पहले स्टील उद्योगों के लोड फैक्टर में छूट देकर घरेलू उपभोक्ताओं से कम दर पर बिजली मुहैया कराने का रास्ता खोला। उस दौरान करोड़ों का खेल हुआ। अब टेरिफ में अंतर होने का बहाना बताकर उन्हें फिर से लाभ पहुंचाया जा रहा है। स्टील उद्योगे अलावा अन्य कारोबारियों को भी इसमें लाभ दिया जा रहा है।

अब कंपनी की 6300 करोड़ से अधिक का घाटा बताकर पूरा भार घरेलू उपभोक्ता पर डाल दिया। कंपनी ने तो 8.40 रुपए बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। नियामक आयोग ने 7.13 रुपए तक की स्वीकृति दी। दरों पर लगने वाला 11 प्रतिशत टैक्स इसमें जोड़ा जाए ताे दर बढ़कर 8.40 रुपए ही होगा।

व्यापारियों की पार्टी जब सरकार में हो तो उनके लिए रास्ता खोल कर रखा जाता है। ऐसे में जनता बिजली बिल हॉफ के नाम छूट को याद कर रही है। बिजली के दाम उस समय बढ़े पर इतना भार पता ही नहीं चला। अब यह सरकार अपनी प्रतिष्ठा से ज्यादा अफसरों की हाँ में हाँ मिलाने में लगी हुई है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में हर वर्ग परेशान है। बढ़ती कीमतों ने उनकी कमर ताेड़ दी है।

देखा जाए तो वितरण कंपनी का आईपीओ लाकर इसे पहले ही निजी हाथों में सौंपने की पटकथा लिखी जा चुकी है। याद करें जब मोबाइल का प्रचलन बढ़ा तो निजी कंपनियों ने बीएसएनएल के टॉवर का उपयोग किया, और सरकार ने सरकारी कंपनी को अपने संसाधन और केबल बढ़ाने का कोई सपोर्ट नहीं किया। निजी कंपनियों ने उसे ही खोखला कर अपने बढ़े टैरिफ से आज आगे बढ़ गए। सस्ते में व्यापार कर आज उसी कंपनी के ऊपर चढ़ बैठे हैं।

ऐसा ही खेल पीडीसीएल के खेल रहे हैं। वे अपने पूर्व अफसर, जो अडानी के खास है, उनके इशारे पर काम कर रहे है। वे अहमदाबाद से बैठक छत्तीसगढ़ में अडानी को जमाने का खेल उनके माध्यम से खेल रहे हैं। पॉवर कंपनी के पॉवर को सीज करने अब आगे और बड़े खेल होंगे। वैसे चाणक्य ने साफ कहा है कि जहां सरकार व्यापारी के हाथों में हो वहां पर जनता को नीचा ही देखना पड़ता है।

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