Cockroach Janta Party Protest: देश की राजधानी दिल्ली में संसद के मॉनसून सत्र से पहले सीजेपी का प्रदर्शन और तेज हो चला है. आज यानी कि 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया था. इसके साथ से ही पूरे इलाके में करीब 5 हजार पुलिस बल तैनात किया गया है. हालांकि रात से ही वहां भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. सुबह होते होते पूरा जंतर मंतर फुल नजर आ रहा है.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कहना है कि NEET समेत कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है. इसी वजह से अब आंदोलन को सीधे संसद तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है.
हालांकि राजधानी में इस प्रस्तावित मार्च से पहले ही पुलिस अलर्ट पर है. नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है. पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति संसद क्षेत्र की ओर किसी भी तरह का जुलूस या प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी.
20 जुलाई की तारीख ही क्यों चुनी गई?
CJP ने यह तारीख किसी संयोग से नहीं चुनी है. 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. सीजेपी का कहना है कि जब देशभर के सांसद संसद में मौजूद होंगे, तब शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया जा सकता है. आंदोलनकारियों की कोशिश है कि पेपर लीक, परीक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य का सवाल संसद के भीतर गूंजे. यही वजह है कि संसद सत्र के पहले दिन ही ‘चलो संसद’ अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया.
सोनम वांगचुक की जगह किसके हाथ में आंदोलन?
शुरुआत में इस अभियान का चेहरा शिक्षा सुधार की मांग को लेकर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक थे. लेकिन, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद आंदोलन की कमान CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने संभाली और उन्होंने अनशन शुरू कर दिया.
अब संसद मार्च का नेतृत्व अभिजीत दीपके के साथ वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी कर रही हैं. आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वांगचुक अस्पताल में हैं, लेकिन उनकी मांगों पर संघर्ष जारी रहेगा.
आखिर CJP चाहती क्या है?
संगठन का आरोप है कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है. इसलिए सरकार को केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जवाबदेही भी तय करनी चाहिए.
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है.
मानसून सत्र से पहले अलर्ट पर पुलिस
संसद सत्र शुरू होने और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा अलर्ट हैं. पुलिस का कहना है कि संसद के आसपास संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण बिना अनुमति किसी भी भीड़ को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा. इसी कारण एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रदर्शनकारी पुलिस की रोक के बावजूद संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते हैं या नहीं. यदि ऐसा होता है तो मौके पर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बन सकती है. वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी चाहते हैं कि शिक्षा का मुद्दा संसद के पहले ही दिन राष्ट्रीय बहस का केंद्र बने.
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