रायपुर: प्रदेश के पुलिस महकमे के अफसरों के तबादले में कांग्रेस शासनकाल में मलाई खाने वाले अफसरों को भाजपा सरकार में भी मलाई दार पदों पर बिठाया गया है। डीजीपी जीपी सिंह को तीन साल बाद सरकार ने पोस्टिंग दी है। अब तक वे पीएचक्यू में ही काम करते रहे। उन्हें पीएचक्यू से बाहर प्रशिक्षण अकादमी में भेजकर उन दावेदारों को निपटाने का प्रयास किया गया है जो इसके दावेदार रहें।
पुलिस भर्ती प्रकरणों के मुख्य किरदार निभाने वाले एसआरपी कल्लूरी को पुलिस हाउंसिंग कारपोरेशन में बिठाकर उन्हें इनाम दिया गया है। विवादों में रहे पवन देव को भी अग्निशमन में बिठाकर पीएचक्यू में एक तरफा राज कायम रखने का प्रयास किया गया है। पूरी लिस्ट देखी जाए तो प्रदीप गुप्ता, विवेकानंद, आनंद छाबड़ा, दीपांशु काबरा और ओपी पाल मजे में हैं। जिन्हें उनके वर्तमान कार्य के अलावा कई अन्य अतिरिक्त प्रभार दिए गए है। उन्हें कांग्रेस शासन काल में भी कई बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। महादेव सट्टा से लेकर परिवहन के ये सारे किरदार सरकार के पोषक के रूप में जाने जाते रहे। अब इस सरकार में भी पोषक बने हुए हैं। कहा जाता है कि इनमेें से कुछ लोग ईडी के दायरे में रहे, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही नए गठजोड़ से फिर मुख्यधारा में शामिल हो गए।
सुपर डूपर फेलियर व्यवस्था
वैसे सीएम सचिवालय के सुपर सीएम सहित अन्य लोगों ने इस सूची को बनाने में काफी मेहनत की है। एक भी एसपी इसमें शामिल नहीं है। क्योंकि अभी सभी जिलों में कानून व्यवस्था के हालात बिगड़े होने के बाद भी उन्हें बचाने में खड़े हैं। राजधानी से लेकर हर जिले की वारदातों को देखा जाए तो आम लोगों मं फीलगुड नहीं है। आने वाले समय में कैसा समीकरण बनेगा वो दिखेगा।
कमाई कराने वालों को तहरीज
डीजीपी, एडीजीपी, डीआईजी, आईजी और एआईजी की सूची सरकार की पूरी छवि को एक सुनियोजित इशारे की ओर इंगित कर रही है। अंतिम ढाई साल चुनाव को बचा है। फंड जनरेट करने के हिसाब से पुलिस को फ्री हैंड दिए जाने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे जिले जहां से ज्यादा फंड जनरेट हो सकता है उनका टारगेट और बढ़ाने के संकेत दिख रहे हैं।
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