Gariaband: छत्तीसगढ़ में खराब सड़कों की समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही. एक तरफ अंबिकापुर सीतापुर की जर्जर सड़क का हाल देखखर लोगों का हाल बेहाल है. वहीं दूसरी तरफ गरियाबंद में जिला मुख्यालय से लगे केशोदार तक जाने वाली 3 किमी की सड़क आज भी पक्की सड़क होने का इंतजार कर रही है. हाल यह है कि, बारिश के दिनों में सड़कों पर बने गड्ढे हादसों का कारण बनते हैं तो शुरू के आधा किमी का सफर तय करने में आधा घंटे का वक्त लग जाता है.
सड़क बना हादसों कारण
बारिश के दिनों में सड़कों पर बने गड्ढे हादसों का कारण बनते हैं तो शुरू के आधा किमी का सफर तय करने में आधा घंटे का वक्त लग जाता है. यहां का नजारा देखने से लगता है कि यहां सड़क में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढे में सड़क मौजूद है.
दरअसल आदिवासी बाहुल्य गांव को नेशनल हाइवे 130 सी से जोड़ने वाली इस सड़क पर वन विभाग का दखल है, लिहाजा नगर पालिका से लेकर सड़क बनाने की सारी योजनाओं का पेंच फंस जाता है. वन विभाग का काष्ठागार भी केशोदार में मौजूद है जहां प्रति वर्ष सैकड़ों टन लकड़ी से विभाग को मोटी राजस्व मिलती है, इसी आय की आड़ लेकर विभाग प्रत्येक वर्ष कच्चे सड़क पर डब्ल्यूबीएम मरम्मत पर लाखों खर्च कर देता है.
जिला मुख्यालय से लगा हुआ है मार्ग
अब नए अफसर कह रहे हैं कि कोई विभाग पहल करे तो अनुमति देने में उन्हें गुरेज नहीं होगा. ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यालय से लगा गांव होने के बावजूद सड़क की हालत बेहद खराब है. स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
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