Chhatarpur Firing Case में आया बड़ा अपडेट! शालिग्राम गर्ग को हाईकोर्ट से बेल, ₹50 हजार के बॉन्ड पर रिहाई का आदेश

भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को छतरपुर गोलीकांड में जमानत दे दी है। मंगलवार, 15 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने 50 हजार रुपये के मुचलके पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। शालिग्राम पर मोतीलाल कुशवाहा के साथ मारपीट और गोली चलाने का आरोप है। इस मामले में उन्हें 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था।

50 हजार रुपये के मुचलके पर मिली जमानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की। शालिग्राम गर्ग की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित डेव ने पक्ष रखा।

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि शालिग्राम को झूठे मामले में फंसाया गया है। वकीलों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि मामले के जरिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और उनके परिवार की छवि खराब करने की कोशिश की गई।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शालिग्राम गर्ग को जमानत देने का आदेश दिया। 50 हजार रुपये के मुचलके पर उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है छतरपुर गोलीकांड का मामला?
यह मामला जुलाई 2026 का है। छतरपुर जिले के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा ने शालिग्राम गर्ग और उनके साथियों पर मारपीट तथा गोली चलाने का आरोप लगाया था।

मोतीलाल के मुताबिक, शालिग्राम अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्हें घर से बाहर खींचकर लाया गया और लाठियों से मारपीट की गई। इसके बाद शालिग्राम पर तीन से चार गोलियां चलाने का आरोप लगाया गया।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इस दौरान एक गोली उनके सीने में लगी थी। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के जरिए गोली निकाली गई।

मोतीलाल ने यह भी आरोप लगाया था कि शालिग्राम उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी विवाद के बाद मारपीट और गोलीबारी की घटना हुई।

धीरेंद्र शास्त्री ने भाई से संबंध होने से किया था इनकार
गोलीकांड के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शालिग्राम से संबंधों को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका शालिग्राम या परिवार के अन्य सदस्यों से कोई लेना-देना नहीं है।

फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालिग्राम गर्ग को राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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