रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL-2023) को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने सरकार के इस फैसले को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया। हाईकोर्ट के इस निर्णय से परीक्षा में सफल हुए हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर लगी रोक
दरअसल, राज्य सरकार ने कथित प्रश्नपत्र लीक और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों के बीच 18 अगस्त को जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। सरकार के इस फैसले से परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की उम्मीदों को झटका लगा था।
इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएं दाखिल कीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना को निरस्त कर दिया।
अभ्यर्थियों ने उठाया था पक्ष रखने का मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि परीक्षा रद्द करने से पहले सफल अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना था कि कथित अनियमितताओं के लिए सभी सफल उम्मीदवारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई थीं और प्रश्नपत्र लीक होने के साक्ष्य भी मिले थे। इसी आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने लिए थे कई फैसले
गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने पहले भी कई कदम उठाए थे। वर्ष 2014 से आयोजित जेपीएससी, जेएसएससी और आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल से जुड़ी 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया था। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए गए थे। अब जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने के आदेश को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बाद अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं।
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