हरियाणा के युवा वर्ग को आत्मनिर्भर और कुशल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक युगांतकारी नीतिगत फैसला लिया है। प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में कौशल विकास का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राओं को अब सरकार की तरफ से हर महीने तकरीबन 2000 रुपये की वित्तीय सहायता (स्टाइपेंड) मुहैया कराई जाएगी। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्र-छात्राओं को संबल देना है, ताकि पैसों की तंगी उनके हुनरमंद बनने के सफर में रुकावट न बन सके।
मासिक भत्ते के शुरू होने से ‘ड्रॉप-आउट’ दर में भारी कमी आएगी
कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार प्रतिभावान बच्चे महज आर्थिक तंगी के कारण अपनी व्यावसायिक शिक्षा को बीच में ही छोड़ देते हैं। इस मासिक भत्ते के शुरू होने से ‘ड्रॉप-आउट’ दर में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही राज्य के युवा विभिन्न उद्योगों की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार खुद को ढालने और नया हुनर सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
तकनीकी शिक्षा के प्रति नजरिया बदलेगा
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस कदम को केवल एक सरकारी अनुदान या खैरात के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में यह राज्य के युवाओं के सामर्थ्य और उनके सुनहरे भविष्य में किया गया एक बड़ा निवेश है। इस नीति के लागू होने से संस्थानों में विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति (अटेंडेंस) में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही समाज में तकनीकी शिक्षा के प्रति नजरिया बदलेगा और यह युवाओं के लिए अधिक सम्मानजनक व पसंदीदा विकल्प बनकर उभरेगी।
सरकार को पूरा भरोसा है कि वित्तीय प्रोत्साहन और उद्योग-आधारित व्यावहारिक ज्ञान का यह अनूठा संगम प्रदेश में हुनरमंद युवाओं का एक नया ढांचा तैयार करेगा। जब युवाओं के पास व्यावहारिक अनुभव होगा, तो रोजगार के बाजार में उनकी मांग बढ़ेगी। इससे कंपनियों और कारखानों को भी अपनी जरूरतों के अनुरूप पहले से तैयार और पूरी तरह प्रशिक्षित जनशक्ति (मैनपावर) आसानी से मिल सकेगी।
प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले की खिड़की खुली
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत हरियाणा के कुल 377 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले की खिड़की खुल चुकी है। राज्य भर में फैले इन केंद्रों में 197 सरकारी और 180 निजी (प्राइवेट) आईटीआई शामिल हैं। इन सभी संस्थानों को मिलाकर प्रदेश में लगभग 1 लाख सीटें उपलब्ध हैं, जहां विद्यार्थी प्रवेश पा सकते हैं।
विद्यार्थियों की रुचि को ध्यान में रखते हुए यहां 89 से भी अधिक तकनीकी (इंजीनियरिंग) और गैर-तकनीकी (नॉन-इंजीनियरिंग) शाखाएं मौजूद हैं। इन संस्थानों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां वेल्डिंग, फिटिंग जैसे पारंपरिक कोर्सेज के साथ-साथ आज के डिजिटल युग की मांग के अनुसार नवीनतम तकनीकों पर आधारित आधुनिक कोर्स भी सिखाए जा रहे हैं।
फैक्ट्रियों में सीधे काम सीखने का अवसर
इस बार के दाखिलों में सरकार ‘ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग’ (DST) यानी दोहरे प्रशिक्षण दृष्टिकोण को विशेष रूप से धरातल पर उतार रही है। इस अभिनव प्रणाली के तहत छात्रों की पढ़ाई केवल संस्थान के कमरों या थ्योरी की किताबों तक सीमित नहीं रहेगी।
उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान सीधे नामी कंपनियों और फैक्ट्रियों के भीतर जाकर व्यावहारिक काम सीखने का अवसर मिलेगा। इस ऑन-साइट ट्रेनिंग से प्रशिक्षु वास्तविक कार्यप्रणाली, जटिल मशीनों के संचालन और औद्योगिक सुरक्षा मानकों को करीब से समझ सकेंगे, जो भविष्य में उन्हें सीधे नौकरी दिलाने में मददगार साबित होगा।
प्रवेश के नियम और निशुल्क सहायता डेस्क
वर्तमान सत्र 2026-27 के इन कोर्सेज में नामांकन के लिए न्यूनतम योग्यता 8वीं, 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण रखी गई है। छात्र अपनी शैक्षिक योग्यता और पसंद के ट्रेड के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
दाखिले की इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के उद्देश्य से विभाग की ओर से हर आईटीआई परिसर में ‘विशेष सहायता केंद्र’ (हेल्प डेस्क) चालू कर दिए गए हैं। इन सहायता केंद्रों पर मौजूद एक्सपर्ट्स छात्रों को फॉर्म भरने, जरूरी दस्तावेजों की जांच (वेरिफिकेशन) कराने और चॉइस फिलिंग से लेकर सीट अलॉटमेंट तक की पूरी जानकारी और मदद बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध करा रहे हैं।
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