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‘विष्णु’ ने बदनामी से बचने ‘लखन’ को दी शराब का जिम्मा

छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का धंधा जोरों पर हैं। हर जिले में एक रैकेट काम कर रहा है, जो पुलिस से मिलकर अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं। स्थिति यह हैं कि उनकी शिकायत करने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बताया गया है कि सरायपाली विधानसभा अंर्तगत एक गांव ऐसा भी है जहां पर घर-घर शराब बन रहा है। यहां से शराब बलौदाबाजार, रायगढ़, बिलासपुर सहित अन्य जिलों निरंतर सप्लाई हो रही है। छत्तीसगढ़ में पिछला चुनाव शराब के अवैध धंधे पर लड़ा गया था, धरसींवा विधानसभा का बड़ा नगर क्षेत्र खरोरा लगातार शराब के अवैध बिक्री के लिए जाना जाता रहा है।

गांव-गांव युवावर्ग इसे अपनी कमाई का जरिया बना रहे है और पुलिसिंग भी इसके इर्द-गिर्द मंडराती दिखती है, थानों में बड़ा काम अब ज्यादातर शराब और शराब बेचने वालों की धर पकड़ ही रह गई है। खरोरा नगर से लगे केसला ग्राम पंचायत में बीते दिन एक बड़ा जन आक्रोश अवैध शराब बिक्री को लेकर था, महिलाएं, जनप्रतिनिधि और पंचायत जनपद सदस्यों ने रैली की शक्ल में अवैध शराब बिक्री का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि पुराने अनुभव को देखते हुए आबकारी विभाग सीएम साय ने छोड़ दिया है। अब लखनलाल देवांगन को इसका जिम्मा दिया है। अर्थात शराब की काली कमाई का एक और हिस्सा मिलेगी। छह हजार करोड़ का लक्ष्य विभाग ने कई तरह के कदम उठाए हैं।

शराब के खपत में अव्वल
छत्तीसगढ़ में लगभग 35.9 पुरुष और 2.8 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं, जो भारत के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। प्रदेश के 41 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं, तो राजस्व भी उसी हिसाब से आना चाहिए। यह बता दें कि पिछली सरकार में शराब पर जो खेल होता था, उसके खिलाड़ी अब सांय-सांय यहां पर खेल रहे हैं। कांग्रेस ने शराबबंदी की घोषणा की थी, परंपराओं और अन्य कारणों से उसे पार नहीं किया जा सका। वहीं हाल भाजपा का भी है, वह अवैध शराब पर रोक नही लगा पा रही है।

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