कहते है सत्ता परिवर्तन में केवल दल परिवर्तन होता है। सरकारी अधिकारी नहीं बदलते है। बदलाव होता है केवल मुख्यमंत्री के आसपास के सरकारी और गैर सरकारी चेहरों का। भाजपा में एक नारा प्रचलन में रहता है चाल, चेहरा और चरित्र। इसके बल पर ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों का चयन होता है। लोकसभा चुनाव के छह महीने पहले तीन राज्यों राजस्थान , छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव हुए। मध्य प्रदेश भाजपा सरकार ही थी। शिवराज सिंह चौहान लाडली बहन योजना चलाकर जीत पक्की कर चुके थे। दो राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में। उम्मीद नहीं के बराबर थी भाजपा की दोनों राज्यों में लेकिन मध्य प्रदेश फार्मूला कारगर साबित हुआ। दिल्ली को मुगालता हो गया कि यहां के हम सिकंदर।
नई संस्कृति ने जन्म लिया और दिल्ली से नाम तय हो गए। तीनों राज्यों के कद्दावर नेताओं की दुकान बंद कर रिमोट सरकार तय हो गई(ऐसा कहा जाता है)। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय को मुख्य मंत्री का दायित्व मिला। फ्लैश बैक पर चलते है। भूपेश बघेल की सरकार में एक व्यक्ति का अभ्युदय हुआ।नाम था सूर्यकांत। भ्रष्टाचार का आसमान में ये नाम ऐसा था जिसके आभा के सामने सभी नेता,अधिकारी नत मस्तक हो गए। कभी होटल, कभी, कार्यालय, कभी दिल्ली कभी बेंगलुरु,कभी ऋषिकेश में बैठकर प्रथम श्रेणी के अधिकारियों की पोस्टिंग का काम देखने लगे। सरकार को मिलने वाले गैर सरकारी कमीशन का काम भी हाथ में ले लिया। बताया जाता है कि चाहे निगम हो या मंडल, पार्टी के पदाधिकारी हो सरकारी कर्मचारियों की पोस्टिंग सूर्य कांत, ही सूर्यकांत था।
जनता ने कांग्रेस को खारिज कर दिया।भाजपा को बैठा दिया। सूर्यकांत, खारिज नहीं हुआ। ये जरूर है कि चेहरा बदल गया, नाम का पर्यायवाची आ गया। हमारे देश में सूर्य को रवि, भास्कर, प्रभाकर, दिनकर, न जाने क्या क्या कहते है। ये भी कहते है कि उगते रवि को सभी सलाम करते है। इधर पार्टी संगठन में एक रवि को लेकर बड़ा आक्रोश है। बताया जा रहा है कि सूर्यकांत का नाम बदल गया है।अब उसे रवि के नाम से जाना जाता है। दिल्ली में सरकार के गठन के बाद थोक में शिकायत भी पहुंची थी।प्रधान मंत्री कार्यालय से आदेश भी हुए थे लेकिन जो काम पर्दे के सामने से हो रहा था वो पर्दे के पीछे से चलने लगा है। रवि भले बादलों में कभी छुप कर रहा है? जहां न पहुंचे रवि वहां कवि पहुंच गए है। सरकारे आती है जाती है रवि ,सूर्यकांत कभी मरा नहीं करते। उनकी जरूरत हर सरकार को पड़ती है।आखिर कोई न कोई चाहिए जो जिम्मेदारी को जिम्मेदारी से निभाए। संगठन में अजीब सी कसमसाहट है, रवि को लेकर!
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