सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद आलोक शुक्ला दो दिन तक रायपुर न्यायालय में समर्पण करने गए। जानकर व्यक्ति है, भारतीय प्रशासनिक सेवा का दीर्घ अनुभव है। स्वाभाविक है अपने मातहतों को जेल भेजने के लिए जुगत लगाए होंगे। वे बेचारे जमानत के लिए भटके होंगे, पैसा ओर पहुंच ज्यादा नहीं रही होगी तो जेल भी गए होंगे। कोई अधिकारी गलती करे तो उसे उल्टा लटकाने वाले अधिकारी बने हुए थे आलोक शुक्ला।
जब जान रहे थे कि बुरे काम का बुरा नतीजा तो देख समझ लेना था। नहीं समझे। अधिकारियों का भ्रष्ट्राचार सिद्ध नहीं कर पाए लेकिन खुद भ्रष्ट्राचार के दलदल में गिर गए। गंदगी भी किए तो उस विभाग ने जहां प्रदेश को भूतपूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने सबसे ज्यादा मेहनत की थी। गरीबों को मुफ्त में चांवल देने की योजना को देश में ऐसी सफलता मिली कि देश के हर राज्य देखने को आया करते थे।
मुफ्त में खा रहे है मतलब दान की बछिया के दांत देखना मना है। अनिल टुटेजा पुराने खिलाड़ी नान में घोटाले का बीजारोपण कर चुके थे। आलोक शुक्ला को भी समेट लिए।। शुरू हुआ खेल जिसका पार्ट 2 रोशन चंद्राकर ने भी खेला ।दोनों पार्ट में अनिल टुटेजा स्थाई था लेकिन पहले पार्ट में आलोक शुक्ला साथी बने।
सरल काम था। भारत सरकार ने जिस गुणवत्ता का चांवल स्टैंडर्ड निर्धारित किया था उससे घटिया चांवल लेने की सांठ गांठ राइस मिलर्स से कर घटिया चांवल लेना शुरू कर दिए। लाखों क्विंटल घटिया चांवल खिला कर दोनों अधिकारी अनुपातहीन संपत्ति अर्जित कर लिए।
प्रदेश व्यापी छापा पड़ा था और ऑफिस के सोफा में,, रैक में, टेबल के नीचे, सूटकेस में पैसे ही पैसे मिले थे। कंप्यूटर में साप्ताहिक हिसाब मिला। शासन ने आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को निलंबित कर दिया। गिरफ्तारी का डर समाया लेकिन सरकार बदल गई। अनिल आलोक की जोड़ी ने भूपेश बघेल सरकार के सामने अपना जमीर,ईमान सब गिरवी रखकर डा रमन सिंह को बदनाम करने में लग गए। हाइ कोर्ट खरीदने चले गए ,खरीद भी लिए और अग्रिम जमानत का चार साल लुत्फ आलोक शुक्ला ने तो उठाया।
अनिल टुटेजा कच्चे खिलाड़ी पहले भी थे, बाद में भी निकले। अनिल टुटेजा, छत्तीसगढ़ के पहले और शायद आखिरी आई ए एस अधिकारी होंगे जिनके खिलाफ सारी केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य की जांच एजेंसी ने चार्ज शीट दाखिल किया है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड अनिल टुटेजा का नाम शामिल होगा। आलोक शुक्ला के लिए बीते पांच दिन कठिन दिन रहे।
गिरफ्तार होने आ रहे थे बीच में दो दिन छुट्टी पड़ गई।आज अंततः प्रदेश के गरीबों को घटिया चांवल खिलाने के अधिकृत आरोपी बन गए है। अपने मातहत कर्मचारियों को शिक्षा देते थे। निर्दोष होगे तो न्यायालय बाईज्जत बरी होगे।गुनाह किए होगे तो सजा पाओगे।आलोक शुक्ला के कानो में ये आवाज गूंज रहा होगा। 65साल की उम्र में जमीन में सोना, बिना वातानुकूलित माहौल के? किल्लोल नहीं कर रहे है,दिल्ली आपको बुला रही है
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