रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने बिजली वितरण कंपनी के अधिकारियों को तलब कर बिजली की मांग और उपलब्धता, अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही कटौती तथा बिजली संकट से निपटने के लिए तैयार कार्ययोजना की जानकारी मांगी है। बताया गया है कि प्रदेश में करीब एक महीने से बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी की स्थिति बनी हुई है। आयोग ने कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि कटौती किन कारणों से की जा रही है और आपूर्ति सामान्य करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों उरला, सिलतरा, भनपुरी और भिलाई में बिजली कटौती को लेकर उद्योगों की परेशानी बढ़ गई है। उद्योग संचालकों का दावा है कि सितंबर में करीब 23 दिनों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा, जिससे कई इकाइयों का उत्पादन घटकर लगभग 25 प्रतिशत तक रह गया। प्लास्टिक, स्टील और रोलिंग मिलों में बार-बार बिजली जाने से उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं। बिजली संकट के बीच नियामक आयोग ने कंपनियों से मांग और आपूर्ति के अंतर को दूर करने, कटौती के कारणों और वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में जानकारी मांगी है। दूसरी ओर, बिजली वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक ने अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रहने की बात कही है।

6300 मेगावाट से ऊपर पहुंची मांग
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 6,300 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है। बढ़ती मांग और उपलब्ध बिजली के बीच अंतर के कारण अघोषित कटौती की स्थिति बनने की बात कही जा रही है। उद्योगों का कहना है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने से मशीनें और भट्टियां बंद करनी पड़ती हैं, जिससे उत्पादन के साथ कच्चे माल को भी नुकसान पहुंचता है।

उद्योग संगठनों ने मांगी निर्बाध बिजली
उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों ने मुख्यमंत्री तथा विद्युत नियामक आयोग से शिकायत कर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार बिजली कटने से उत्पादन लागत बढ़ रही है, श्रमिकों का समय बर्बाद हो रहा है और तय समय पर माल की आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter