चौबे जी, छब्बे होने चले

देश भर के राजनैतिक दलों में ओबीसी राजनीति का जलवा है।जिनकी जितनी हिस्सेदारी उतनी उनकी भागेदारी का सिद्धांत दौड़ रहा है। इसके चलते सामान्य जाति खासकर ब्राह्मणों को दरकिनार करने की मजबूरी बढ़ते जा रही है। छत्तीसगढ़ में तो आदिवासी और ओबीसी का ही वर्चस्व है।इसके चलते हर राजनैतिक दल इकाई संख्या आधार पर विधान सभा सीट बांट रहे है।

पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने साजा से कद्दावर ब्राह्मण रविन्द्र चौबे को टिकट दी थी। चौबे जी जेन नेस्ट के हिसाब से पुस्तैनी साजा सीट से चौबे परिवार के तीसरी पीढ़ी के रूप में पुत्र को आगे लाना चाहते थे। कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए रविन्द्र चौबे अति विश्वसनीय रहे थे इस कारण आखिरी बार लड़ने के लिए मना लिए।

जीत दूर रह गई और चौबे जी, दुबे हो गए। डेढ़ साल में सत्ता की दूरी ने कइयों को असलियत दिखा दी है।भविष्य में ब्राह्मण कितने कारगर होंगे, प्रश्न है। ओबीसी बहुल क्षेत्रों में तो और भी बंटाधार है। ऐसे में साजा से तीसरी पीढ़ी को टिकट कैसे मिले इस प्रश्न को साध कर चौबे जी छब्बे होने का दांव लगा दिए। वक्त भी था, मौका भी था और दस्तूर भी। बस कह दिए मन की बात(ये प्रधानमंत्री का एकाधिकार है) कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की चाबी केवल भूपेश बघेल के पास है,सो प्रदेश कांग्रेस का भार भूपेश बघेल को मिलना चाहिए। दोस्ती हो तो ऐसी हो।

राजनीति में हर शब्द और वाक्य के अर्थ निकाले जाते हैं। चौबे जी के भी कहे का अर्थ निकाला गया। सबसे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बेंज के व्यक्तव्य आया।चौबे की निजी विचार है इसका पार्टी से लेना देना नहीं है। कांग्रेस की भले ही विचारधारा एक है लेकिन विचार सामूहिक नहीं है। व्यक्तिगत है अगर पार्टी प्रवक्ता ने अधिकृत रूप से नहीं कहा है या पार्टी ने किसी को अधिकृत नहीं किया है।चौबे जी को अधिकृत भी नहीं किया गया था। ऊपर से कांग्रेस का कोई सम्मेलन भी नहीं था।

कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी है।इससे कांग्रेस को ही इंकार नहीं है। नेता प्रतिपक्ष बनाने के समय भी भूपेश बघेल का नाम आया था लेकिन सत्ता में रह कर सत्यानाश करने का कुकर्म भी उनके नाम के सामने आया। घोटाले पर घोटाला, कांग्रेस कुकर्म समिति (काकस) जिसमें भ्रष्टतम आईएएस आईपीएस,राज्य स्तरीय अधिकारियों जिसमें सौम्या चौरसिया भी है,सहित ढेबर,तिवारी परिवार सहित अनेक कुकर्मी शामिल थे को ही प्रमुखता दी गई। कांग्रेस के मंत्री विधायक सहित कार्यकर्ता उपेक्षित रहे, भूखे रहे। मुख्यमंत्री कार्यालय के चौकड़ी ने उल्टी करते तक रुपया खा गए।

कांग्रेस के बहुत से भूतपूर्व मंत्री आज खुली हवा में सांस ले रहे है लेकिन कवासी लखमा महीनों से जेल में बिना दारू पिए दारू घोटाले में अंदर है। जिस भूपेश बघेल को पार्टी की बागडोर देने की बात चौबे जी कर रहे है उन्हीं का बेटा जेल यात्रा में है। चौबे जी दुबे जी है छब्बे होने जा रहे है लेकिन इसका पार्टी लाइन से कोई समर्थन नहीं है

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