गोपालगंज। जिले के गोपालपुर थाना क्षेत्र के सवनही पट्टी गांव में शनिवार दोपहर को शौचालय की नई बनी टंकी की सेंट्रिंग (फ्रेम) खोलने के अंदर उतरे चार मजदूरों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। इस एक साथ हुई चार मौतों से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और मृतकों के घरों में कोहराम के साथ मातम पसरा हुआ है।
15 दिन पहले हुई थी टंकी की ढलाई
मिली जानकारी के अनुसार, सवनही पट्टी गांव निवासी गयासुद्दीन मियां के घर करीब पंद्रह दिन पहले शौचालय की टंकी की छत की ढलाई कराई गई थी। शनिवार की दोपहर को इसी टंकी के अंदर से लकड़ी और बांस की सेंट्रिंग को हटाने के लिए मजदूर एक-एक करके नीचे उतरे थे। टंकी के अंदर पर्याप्त वेंटिलेशन न होने और काफी समय से बंद रहने के कारण वहां जहरीली गैसें जमा हो चुकी थीं। अंदर कदम रखते ही सभी का दम घुटने लगा और वे गंभीर रूप से अस्वस्थ होने लगे।
एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में जान गंवाई
टंकी के भीतर काम के दौरान बिगड़ती हालत को देखकर वहां अफरातफरी मच गई। उन्हें बचाने के चक्कर में एक के बाद एक अन्य मजदूरों भी अंदर उतरते चले गए, जिससे हादसा और भी बड़ा हो गया। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले की पहचान सवनही पट्टी गांव के रमाशंकर बैठा के पुत्र बंटी बैठा, घर के मालिक गयासुद्दीन मियां के पुत्र टीपू, पड़ोसी गांव सवनही वृत्त के विश्वनाथ यादव के पुत्र उमेश यादव तथा श्रीपुर थाना क्षेत्र के गिदहा गांव निवासी एक अन्य युवक के रूप में हुई है।
अस्पताल पहुंचने पर हुई पुष्टि
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों की मदद से सभी को टंकी से बाहर निकाला गया। इस दौरान बचाव कार्य में जुटे मंजूर खान के पुत्र सिराज खान भी गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में सभी पीड़ितों को फुलवरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद चारों कामगारों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, घायल सिराज खान को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए गोपालगंज सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पुलिस जांच में जुटी, गांव में पसरा सन्नाटा
घटना की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लेते हुए जांच-पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने चारों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गोपालगंज सदर अस्पताल भेज दिया है। एक साथ चार अर्थियां उठने से पूरा गांव गमगीन है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने का प्रयास किया जा रहा है।
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