पन्ना। आदिवासी बहुल गांव टेढ़ी मझौली के ग्रामीणों का दर्द सड़कों के गड्ढों से कहीं अधिक गहरा है। हाल ही में जब ग्रामीणों ने गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा को रोककर अपनी आपबीती सुनाई, तो उनकी आवाज में सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि अपने बच्चों के संवरते भविष्य की गुहार थी। महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि जर्जर रास्ते के कारण बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों का अस्पताल पहुंचना कठिन हो गया है।
विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से 2 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत हो चुकी है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू कराया जाएगा।
हालांकि, ग्रामीणों का सवाल वाजिब है जब तक पक्की सड़क नहीं बनती, तब तक के लिए आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? जिस गांव में सड़क नहीं होती, वहां सिर्फ रास्ते नहीं रुकते, बल्कि अवसर और सपने भी कीचड़ में फंस जाते हैं। अब देखना यह है कि कागजों में सिमटी 3 करोड़ की यह सड़क कब धरातल पर उतरती है।
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