अनुकंपा पर नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नौकरी में बड़े बच्चे को मिलेगी प्राथमिकता

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिस पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है. हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक पात्र बच्चे अनुकंपा नियुक्ति का दावा करते हैं, तो बड़े बच्चे को उसकी वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

अनुकंपा नियुक्ति में बड़े बच्चे को प्राथमिकता – हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ने मुंगेली जिले के एक मामले में छोटे बेटे को दी गई अनुकंपा नियुक्ति का आदेश रद्द करते हुए मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को वापस भेज दिया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि पात्रता की जांच के बाद बड़े बेटे के दावे पर 30 दिनों के भीतर विचार किया जाए.

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला मुंगेली के धर्मपुरा स्थित सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय का 29 सितंबर 2016 को निधन हो गया था. उनकी दो पत्नियां थीं. ईश्वर की पहली पत्नी से जन्मे 35 वर्षीय जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से जन्मे राजकुमार, दोनों ने इस नौकरी के लिए आवेदन दिया था. डीईओ ने सात अगस्त 2019 को नौकरी लिए राजकुमार को चुना, जिसके बाद जितेंद्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

दूसरी पत्नी का बच्चा भी होता है वैद्य
वहीं, कोर्ट ने पाया कि हालांकि दूसरी शादी से पैदा हुआ बच्चा आश्रित रोजगार लाभों के लिए वैद्य उत्तराधिकारी होता है, लेकिन राज्य सरकार दे दिशा-निर्देश कई भाई-बहनों में से किसी एक को चुनने के मामले में कोई स्पष्ट बात नहीं कहते हैं.

पटना हाई कोर्ट के फैसले को बनाया आधार
पटना हाईकोर्ट द्वारा राज किशोर बनाम बिहार राज्य मामले में तय किए गए और झारखंड हाईकोर्ट द्वारा अपनाए गए उदाहरणों का कोर्ट ने हवाला दिया है. जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का अधिकार वरीयता के अनुसार ही तय हो.

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