छत्तीसगढ़ के मुसुवा भारी पड़ रहे, खा गए करोड़ाें का धान, सरकार भी बेहाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मार्कफेड के संग्रहण केंद्र में रखे गए करोड़ों रुपए से अधिक के धान को मुसुवा (चूहा) के खाने का रील इन दिनों सोशल मीडिया में खुब चल रहा है। श्रीगणेश की के सवारी मूषक पर इतना बड़ा आरोप लगने के बाद सियासी बवाल के बीच ऐसे मूषक को खोजने में लगे हैं।विभाग के दयालू मंत्री के पास इसका कोई प्रमाण नहीं है इसलिए कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।अधिकारी भी इससे भ्रमित हैं। अब वे भी कुछ नहीं कह पा रहे हैं। यह केवल भोलेनाथ की नगरी कवर्धा में ही नहीं बल्कि मंत्री के क्षेत्र मुंगेली, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद के बाद अब बस्तर में भी सामने आया। लोगों को लगने लगा कि मुसुवा की इतनी तादाद तो छत्तीसगढ़ में नहीं कि लाखों टन धान को चबा जाएं।

एक नेता ने तो सरकार को बिल्ली पालने का सुझाव दिया। वहीं अब मुसुवा पंचायत भी बैठने लगी है। लोगों की जुबान पर एक ही बात सामने आ रही है कि आखिर इतना बड़ा नुकसान होने के बाद भी असली मुसुवा क्यों पकड़ में नहीं आया। अब पूरा अमला इसे खोजने में लगा है। वहीं यह भी पता चला है कि सारी समस्या की एक ही जड़ है। लाल फीताशाही मार्कफेड स्वयं ही इसके निराकरण में अक्षम साबित हुई। दयालू मंत्री जो एक किसान भी है इसके निष्पादन के लिए कोइ्र उपाय नहीं सुझा पाए। दारू वालों ने कुछ धान खरीदा लेकिन उठाव पूरा नहीं हो पाया। अब सरकार चूहा दानी जल्द खरीद कर ऐसे लोगों को देखे जो इसेे पीछे है। मामला कुछ ऐसा है जो नीचे बता रहे हैं।

एक हजार 37 करोड़ का नुकसान

समर्थन मूल्य में खरीदे गए धान की सुरक्षा और रखरखाव का उत्तरदायित्व मार्कफेड का होता है, राज्य गठन के बाद से आज तक इतनी अव्यवस्था और बदइंतजामी कभी नहीं रही जो इस बार देखने को मिली। लापरवाही और उपेक्षा से एक हजार 37 करोड़ 55 लाख का नुकसान एक ही साल की खरीदी में हो चुका है, रोज रोज नए नए मामले लगातार उजागर हो रहे हैं। पिछले वर्ष के धान का निराकरण सरकार नहीं कर पाई है। धान संग्रहण केन्द्रों में पड़े-पड़े सड़ रहे है, भीग गया, चूहे खा रहे, दीमक लग कर खराब हो गया। प्रदेश के अनेको संग्रहण केन्द्रों में सड़े हुये धान का भंडारण दिख जायेगा। धान के खराब होने और सडने के नाम पर सुनियोजित भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

अफसरों के संरक्षण में खेल

पिछले खरीद वर्ष में पूरे प्रदेश में 25 लाख 93 हजार 880 क्विंटल धान की मिलिंग ही नहीं करवाई थी, उक्त धान में से 4 लाख 16 हजार 410 क्विंटल धान विभिन्न खरीदी केंद्रों में बताया गया है तथा शेष 21 लाख 77 हजार 470 क्विंटल धान राज्य सहकारी विपणन संघ के विभिन्न संग्रहण केंद्रों में शेष बताया, अब षडयंत्र पूर्वक धीरे धीरे नष्ट होना बता रहे। इसी के आधार पर बड़ा घोटाला किया जा रहा है। मार्कफेड की लापरवाही के चलते बस्तर के विभिन्न धान संग्रहण केन्द्रों में 1 लाख क्विंटल से अधिक धान सड़ गया है। यह केवल लापरवाही या चूक नहीं बल्कि अफसरों के संरक्षण में किया जाने वाला अपराध है।

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