LPG Crisis: अमेरिकी और ईरान के बीच मंगलवार की रात को सीजफायर की घोषणा हो गई है. इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोलने पर सहमित बनी है. यानी अब दुनियाभर का ऊर्जा संकट टलते नजर आ रहा है. भारत समेत दुनिया भर में जंग की वजह से ऊर्जा संकट मंडरा रहा था. जगह-जगह एलपीजी के लिए लंबी कतारें लगी देखने को मिलीं. संभावना है कि अब एलपीजी की कमी से छुटकारा मिल जाएगा. सरकार ने इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं. बुधवार को केंद्र सरकार ने एलपीजी को लेकर किसी प्रकार की समस्या ना हो, इसके लिए सभी प्रदेशों और उद्योगों के लिए आवंटन सीमा तय कर दिया है.
सरकार ने एलपीजी के लिए अपनी क्राइटेरिया तय की है. जिसके अनुसार, फार्मा, फूड, यूरेनियम, हेवी वाटर, पॉलीमर, एग्रीकल्चर, पैकेजिंग, मेटल, केरेमिक, पेंट, स्टील, बीज, फॉन्ड्री, फॉर्गिंग और ग्लास जैसे सेक्टर्स को भारी मात्रा में एलपीजी देने का फैसला किया है. इन सेक्टर्स में जितनी गैस मार्च 2026 से पहले खपत होती थी. उसकी करीब 70 प्रतिशत LPG अभी भी मिलेगी. सरकार का मानना है कि अगर इन क्षेत्रों को एलपीजी नहीं दी जाएगी, तो लोगों के रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ सकता है.
राज्यों को मिलेगी 70 प्रतिशत एलपीजी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉक्टर नीरज मित्तल ने बुधवार को यह आदेश जारी किया था. जिसके अनुसार, राज्यों को कुल 70 फीसदी एलपीजी का आवंटन किया जाएगा. इसके साथ ही जिन इलाकों में पीएनजी को बढ़ावा दिया जा रहा है. उनको अतिरिक्त 10 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जाएगा. केंद्र सरकार ने आवंटन को लेकर जो सीमा तय की है। उसके अनुसार उन इकाइयों को प्राथमिकता दी जाएगी. जिनमें एलपीजी का उपयोग विशेष काम के लिए किया जाता रहा है और उन्हें पीएनजी में बदला नहीं जा सकता है.
उद्योगों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में रजिस्ट्रेशन कराना होगा और साथ ही पीएनजी के लिए भी अप्लाई करना होगा. लेकिन ऐसी जगह जहां पर एलपीजी जरूरी कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होती है. ऐसी जगहों पर पीएनजी के लिए आवेदन करने पर छूट दी जाएगी. इसके साथ ही केंद्र सरकार सीबीजी पॉलिसी को जल्द से जल्द लागू करेगी.
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