हर मुख्यमंत्री के इर्द गिर्द एक चौकड़ी होती है। कोई भी मुख्यमंत्री चौकड़ी के बिना काम भी नहीं कर सकता है। प्रश्न ये उठता है कि चौकड़ी ,मुख्यमंत्री से सही निर्णय करवा पा रही हैं या नहीं, इसका आंकलन करने का जिम्मा, विरोधी पार्टी,और मीडिया का है। मीडिया भी आजकल दो भागों में बंटा हुआ है।पक्ष और विपक्ष। विपक्ष में लिखने वालो को पक्ष वाले विरोधी करार देते है। पक्षी मीडिया अधिकारी मुख्यत: मुख्यमंत्री को ब्यूटी पार्लर में बैठाकर केवल वो आईना दिखा रहे है जिसमें केवल वाह वाह ही है।
इस महीने नरेंद्र मोदी सरकार ने जीएसटी कम कर आम जनता को राहत क्या पहुंचाई छत्तीसगढ़ का बिजली विभाग में करेंट दौड़ गया। उद्योग को बढ़ावा देने के आड में आम नागरिकों को जोर का झटका लगा दिया गया। छत्तीसगढ़ में लोहा उद्योग को डा रमन सिंह की सरकार ने पंद्रह साल पहले सही मायने में बढ़ावा देने के लिए छूट दी थी। भूपेश बघेल सरकार को इस योजना में लाभ लेने का मौका मिला।वे कमा ले गए। विष्णु देव साय की सरकार आई तो स्टील लॉबी ने अपनी लौह शक्ति दिखाई। ये लोग हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते है,सो इनकी सुनी जाएगी,सुने भी लेकिन तरीका दूसरा था – अंडर टेबल डील।
कारण क्या बताया जाए?
बहुत छूट दे दिए है आम जनता को।किसान को महिला को अरबों रुपए दे रहे है, थोड़ा तो भार देने की बनती है। एक तीर दो शिकार हो गया। सौजन्य से सभी सुखी रहते हैं।ये बता दिया गया। स्टील उद्योग को लाभ मिल गया।लाभ देने वालो को लाभ मिल गया।आम जनता की ऐसी तैसी हो गई। गरीब से गरीब को पिछले माह की तुलना में डेढ़ से दुगुना बिल देना पड़ रहा है.
क्या विष्णु देव साय की चौकड़ी, भीतराघात कर एक आदिवासी मुख्यमंत्री के सीधे होने का अनुचित लाभ उठा रहे है! क्या अपने लाभ के नाम पर विष्णु देव साय को जातीय तौर पर हानि पहुंचाने का खेल चल रहा है! सु बोध
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