राशन चोरो का माल चंडाल खा गया!

सरकार में बैठे अधिकारी अपने द्वारा किए घोटाले को छिपाने के लिए कितना दांव खेलते है इसका खुलासा समाचार पत्रों में छपे दो खबरों से हो जाता है। बस्तर के जिलों में से एक जिले जगदलपुर में 445राशन दुकानों में से 87राशन दुकानदारों द्वारा 6550क्विंटल चांवल की हेराफेरी की गई है। ये चांवल बाजार में 1.70करोड़ रुपए का होता है। बस्तर के अन्य जिलों में भी राशन के चांवल का भारी पैमाने पर घोटाला किया गया है,जिसका हिसाब किताब नहीं है।

यही हाल पूरे प्रदेश का है। दूसरी खबर सरकारी है जिसमें बड़े तरीके से खाद्य मंत्री के बैठक में सूचना दे दी गई कि केवल 335 राशन दुकानों में 124 करोड़ का राशन कम मिला। 119 करोड़ की वसूली हो चुकी है केवल पांच करोड़ की वसूली बची है। ऐसे वसूली के लिए तत्पर वसूली अधिकारी को सरकार द्वारा उत्कृष्ट अधिकारी के रूप में सम्मानित कर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जाना चाहिए.

2022 में 600 करोड़ रुपए के राशन घोटाले का मामला विधान सभा में उठा था। केंद्र सरकार को भेजे गए रिपोर्ट में राज्य सरकार के तत्कालीन सचिव टोपेस्वर सिंह ने स्वीकार किया था कि 48लाख मीट्रिक टन चांवल गायब है। तीन साल में खाद्य संचालनालय और अब मंत्रालय में पदस्थ अधिकारी ने तकनीकी त्रुटि का खेल खेलकर घोटाले में चांवल की मात्रा को विभाग के एनआईसी में हेराफेरी कर कम कर लिया।ये सीबीआई के जांच का विषय है।इस संबंध में शिकायत भी सीबीआई में पहुंच चुकी है.

खाद्य संचालनालय के सूत्र बताते है कि घोटाले के चांवल की मात्रा को एडजेस्ट करने के लिए राशन दुकानदारों से 10रुपए के स्टांप पेपर में शपथ लिखवा लिया गया है। बिना जांच किए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पत्र लिखवा कर राजस्व वसूली का पत्र निकलवा कर इसी राशि को जमा बताया जा रहा है।वास्तविकता ये है कि किसी भी जिले में किसी भी राशन दुकानदार से राजस्व वसूली का पत्र ही नहीं निकला है।

ये जरूर हुआ है कि राशन दुकानदारों से बाजार से चांवल खरीद कर घोटाले की मात्रा को बराबर करने के निर्देश देकर विभाग के सॉफ्टवेयर में एंट्री करा दी गई है। विभाग के नियम अनुसार राशन दुकान में केवल नागरिक आपूर्ति निगम ही चांवल आपूर्ति कर सकता है। बाजार से खरीदे गए चांवल की क्वालिटी का कोई पैमाना नहीं है। राशन दुकानों द्वारा बाजार से चांवल खरीदे जाने का भी कोई प्रमाण नहीं है। इस बात की प्रामाणिक शिकायत सीबीआई में किया जाकर जांच की मांग पंजीकृत संस्था द्वारा की गई है।

सूत्रों ने जानकारी दी है कि 2022में 27राशन दुकानों के खिलाफ एफआईआर किए जाने की सूचना केंद्रीय खाद्य मंत्रालय को दी गई है।तीन साल में प्रदेश में एक भी अन्य राशन दुकान के खिलाफ एफआईआर नहीं कराई गई है। वास्तविकता ये है कि प्रदेश की राजधानी में पांच राशन दुकानदार के खिलाफ पिछले साल चांवल घोटाले को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है।

सरकार का विभागीय अधिकारियों के झूठ को परोसे जाने पर आम जनता में किरकिरी हो रही है। ज्ञात रहे कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए राशन घोटाले की जांच विधान सभा समिति के द्वारा की जा रही है। समिति ने खाद्य विभाग से दो बिंदुओं कि बाजार से कितने राशन दुकान दारो द्वारा चांवल खरीदा गया ओर कितने राशन दुकानों के विरूद्ध राजस्व वसूली के आदेश निकाले गए और वसूली की गई,जानकारी मांगी गई है। विधानसभा के पोर्टल में जानकारी नहीं मिलना बताया जा रहा है।

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