महोबा में जल जीवन मिशन पर सियासी टकराव: विधायक ने मंत्री का काफिला रोका, DM ने कहा-90% से ज्यादा काम पूरा

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में जल जीवन मिशन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। चरखारी से विधायक बृजभूषण राजपूत ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोककर मिशन के तहत हो रहे कार्यों को अधूरा बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। विधायक के इस कदम से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।

विधायक बृजभूषण राजपूत का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में न तो पाइपलाइन का काम पूरा हुआ है और न ही सड़कों की मरम्मत सही तरीके से की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में काम पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने मंत्री के काफिले को रोककर विरोध जताया।

इस पूरे मामले पर महोबा की जिलाधिकारी (DM) गजल भारद्वाज ने विधायक के आरोपों का खंडन किया है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जल जीवन मिशन के तहत जिले में अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 90 प्रतिशत से ज्यादा काम संपन्न हो चुका है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है और जहां कहीं भी कमियां पाई गई हैं, उन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम के अनुसार, महोबा जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल पांच परियोजनाएं संचालित हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से 344 गांवों को जोड़ा गया है। जिले में कुल 3224 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी थी, जिसके मुकाबले 3205 किलोमीटर पाइपलाइन का कार्य पूरा कराया जा चुका है। इसके साथ ही 1 लाख 12 हजार 32 घरों में नल कनेक्शन भी दिए जा चुके हैं।

पाइपलाइन बिछाने के दौरान जिले की कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं। डीएम ने बताया कि लगभग 1131 किलोमीटर सड़कों को नुकसान पहुंचा था, जिसके सापेक्ष 1118 किलोमीटर सड़क की मरम्मत (रोड रेस्टोरेशन) का काम पूरा कर लिया गया है। शेष बचे हिस्सों पर भी तेजी से कार्य कराया जा रहा है।

चरखारी विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए डीएम ने बताया कि यहां 717 किलोमीटर सीसी रोड क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसमें से 706 किलोमीटर सड़क का पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है। बचे हुए करीब 12 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य का थर्ड पार्टी एजेंसी से सत्यापन भी कराया गया है।

डीएम गजल भारद्वाज ने यह भी बताया कि हाल के महीनों में ग्राम प्रधानों और सचिवों के माध्यम से फील्ड वेरिफिकेशन कराया गया था। जिन जगहों पर सड़क या पाइपलाइन से जुड़ी समस्याएं सामने आईं, उनकी सूची बनाकर संबंधित एजेंसियों को सुधार के लिए दी गई है।

फिलहाल, जल जीवन मिशन को लेकर विधायक और प्रशासन के बीच बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बचे हुए कार्य कितनी जल्दी पूरे होते हैं और क्या इस मुद्दे पर सियासी तनाव कम हो पाता है या नहीं।

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