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भारतीय सेना का बड़ा फैसला: ब्रिटिश दौर की पहचान खत्म, 246 सड़कों और इमारतों को मिले वीरों के नाम

भारतीय सेना ने एक अहम और प्रतीकात्मक फैसला लेते हुए ब्रिटिश काल में रखे गए 246 सड़कों और इमारतों के नाम बदल दिए हैं। अब ये सभी सड़कें और भवन अपने नए, भारतीय पहचान वाले नामों से जाने जाएंगे। सेना के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारतीय इतिहास, संस्कृति और सैन्य परंपराओं को सम्मान देना है। साथ ही यह कदम देश के वीर जवानों, परमवीर चक्र विजेताओं, युद्ध नायकों और महान सैन्य अधिकारियों के बलिदान और योगदान को हमेशा जीवित रखने की दिशा में उठाया गया है। भारतीय सेना का मानना है कि यह बदलाव केवल नामों का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और आत्मसम्मान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना ने कुल 246 स्थानों के नाम बदले हैं, जिनमें 124 सड़कें, 77 रिहायशी कॉलोनियां, 27 इमारतें व सैन्य सुविधाएं और 18 अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इन अन्य सुविधाओं में पार्क, ट्रेनिंग एरिया, खेल मैदान, गेट और हेलीपैड भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इन सभी स्थानों के नए नाम वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों और प्रमुख सैन्य नेताओं के योगदान को सम्मान देते हुए रखे गए हैं। सेना ने स्पष्ट किया है कि यह पहल देश की वीरता, बलिदान और सैन्य गौरव को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नाम बदलने का सुझाव स्वयं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2021 में दिया था, जिसे अब ज़मीनी स्तर पर लागू किया गया है। यह फैसला भारतीय सेना की औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर स्वदेशी सैन्य पहचान को मजबूत करने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इस जगह का नाम होगा वीर अब्दुल हमीद लाइंस
दिल्ली कैंट स्थित किर्बी प्लेस को अब ‘केनुगुरुसे विहार’ के नाम से जाना जाएगा, जबकि मॉल रोड का नाम बदलकर ‘अरुण खेतरपाल मार्ग’ कर दिया गया है। यह नामकरण 1971 के युद्ध के नायक और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन अरुण खेतरपाल की वीरता को समर्पित है। इसी क्रम में अंबाला कैंट के पैटरसन रोड क्वार्टर्स को ‘धन सिंह थापा एन्क्लेव’ नाम दिया गया है, जो 1962 युद्ध के परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा के सम्मान में रखा गया है। मथुरा कैंट में न्यू हॉर्न लाइन अब ‘वीर अब्दुल हमीद लाइंस’ के नाम से जानी जाएगी। वीर अब्दुल हमीद 1965 युद्ध के महान नायक थे, जिन्होंने अपनी बहादुरी से दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त किया था। वहीं जयपुर कैंट में क्वींस लाइन रोड का नाम बदलकर ‘सुंदर सिंह मार्ग’ कर दिया गया है। यह नाम देश के एक और वीर सैनिक के अदम्य साहस और बलिदान की याद दिलाएगा।।

नुब्रा ब्लॉक और किंग्सवे ब्लॉक का नाम बदला
इस पहल के तहत अब इन स्थानों को भारतीय वीरों और युद्ध नायकों के नाम से पहचाना जाएगा। बरेली कैंट में न्यू बर्डवुड लाइन का नाम बदलकर थिमैया कॉलोनी कर दिया गया है, जबकि महू कैंट में मैल्कम लाइन्स अब पीरू सिंह लाइन्स के नाम से जानी जाएगी। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में भी अहम बदलाव किए गए हैं। यहां कॉलिन्स ब्लॉक को नुब्रा ब्लॉक और किंग्सवे ब्लॉक को कारगिल ब्लॉक नाम दिया गया है। पूर्वोत्तर भारत में भी सेना ने वीरता को सम्मान दिया है। रंगापहाड़ मिलिट्री स्टेशन के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का नाम बदलकर लैशराम ज्योतिन सिंह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स रखा गया है। वहीं जखामा मिलिट्री स्टेशन में स्पीयर लेक मार्ग अब हैंगपन दादा मार्ग कहलाएगा।

साल 2024 में बदला था फोर्ट विलियम का नाम
भारतीय सेना ने वर्ष 2024 में औपनिवेशिक विरासत से जुड़े प्रतीकों को हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड के मुख्यालय फोर्ट विलियम का नाम बदलकर विजय दुर्ग कर दिया गया, जो महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा गया है। यह फैसला भारतीय इतिहास, संस्कृति और सैन्य गौरव को सम्मान देने की नीति का हिस्सा है। फोर्ट परिसर में मौजूद ब्रिटिश काल के कई नामों को भी बदला गया है। किंग जॉर्ज के नाम पर बना जॉर्ज गेट अब शिवाजी द्वार कहलाता है। फोर्ट की प्राचीर पर स्थित किचनर हाउस, जिसका नाम ब्रिटिश फील्ड मार्शल होरेशियो हर्बर्ट किचनर के नाम पर था, अब फील्ड मार्शल मानेकशॉ भवन के नाम से जाना जाएगा।

इतना ही नहीं, फोर्ट के भीतर मौजूद ऐतिहासिक इमारतों को भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से जोड़ा गया है। चार मंजिला इमारत, जिसे पहले डलहौजी बैरक कहा जाता था और जहां वर्ष 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नजरबंद रखा गया था, अब नेताजी बैरक कहलाएगी। वहीं रसेल ब्लॉक का नाम बदलकर बंगाल के महान स्वतंत्रता सेनानी बाघा जतिन के नाम पर रखा गया है।

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