UCC In madhya pradesh: भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर दशकों से चली आ रही बहस अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है. देश के कई राज्य इसे अब तक लागू कर चुके हैं तो कई राज्य यूसीसी को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं. इन्हीं में मध्यप्रदेश भी है, जहां यूसीसी लागू करने की तैयारी इस समय जोर शोर से चल रही है. सरकार की योजना है कि इस साल दिवाली तक मध्य प्रदेश में UCC का कानून प्रभावी हो जाए. मप्र में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) बिल लाने के लिए बनाई जाने वाली कमेटी का चेयरमैन सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई को बनाया जा सकता है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कमर कस ली है. यही वजह है कि इसे लागू करने के लिए सरकार की तरफ से गृह विभाग को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इसके कहा गया है कि अगले 6 महीने के भीतर विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार किया जाए.
कौन कर सकता है यूसीसी बनाने का काम?
मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से गुजरात और उत्तराखंड राज्य से भी यूसीसी को लेकर जानकारी मांगी गई है. इन राज्यों में भी यूसीसी बनाने का काम सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई ने किया है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश सरकार भी अपना यूसीसी बनाने का काम उन्हें ही सौंप सकती है. रंजना देसाई के साथ 5-6 सदस्य शामिल होंगे, जो हाईकोर्ट के पूर्व जज, रिटायर आईएएस, सोशल वर्कर, अधिवक्ता, विवि के प्रतिनिधि व वरिष्ठ वकील होंगे. यही लोग मिलकर मध्यप्रदेश यूसीसी को तैयार करेंगे.
रंजना देसाई को चुनने के पीछे की वजह
रंजना प्रकाश देसाई को यूसीसी बिल तैयार करने का अनुभव है. उन्होंने ही साल 2025 में गुजरात में कई अधिकारियों के साथ मिलकर यूसीसी बिल को तैयार किया था. इस दौरान न सिर्फ अधिकारियों से उन्होंने राज्य की वास्तविक स्थिति को समझा. बल्कि आम जनता से भी बातचीत कर बिल को तैयार किया था. उन्होंने समय हर समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी और उनकी बात सुनी थी. यही वजह है कि वह बिल बिना किसी बदलाव के पास किया गया था. ऐसी ही कुछ सोच मध्य प्रदेश सरकार की है.
कौन हैं पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई
रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रह चुकी हैं, इसके अलावा भी उन्होंने कई पदों पर काम किया है. स्टिस रंजना प्रकाश देसाई इससे पहले परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की अध्यक्ष बनाया गया था. उन्होंने ही गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी का मसौदा तैयार किया था. देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था. उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज से 1970 में आर्ट्स में ग्रेजुएशन और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से 1973 में एलएलबी की डिग्री हासिल की थी.
कैसा रहा रंजना देसाई का सफर
रंजना देसाई ने साल 1973 में वकालत शुरू की और 1979 में सरकारी वकील बन गई थी. बाद में 1996 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की जज और 2011 में सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त किया गया. यहां उन्होंने 3 सालों तक अपनी सेवाएं दी थी, इसके बाद वह 2014 में रिटायर हो गई थी. इसके बाद भी वे कई पदों पर काम करती रही हैं. रिटायर होने के बाद ही साल 2014 में उन्हें पीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी की चेयरपर्सन बनाया गया था. इस पद पर वह 2017 तक रहीं थी. इस दौरान वह बिजली से जुड़े मामलों का फैसला किया करती थीं. इसके बाद उन्हें इनकम टैक्स की एडवांस रूलिंग कमेटी का हेड बनाया गया था.
देसाई को साल 2019 में लोकपाल चुनने वाली सर्च कमेटी की चेयरपर्सन बनाया गया था. इसमें उन्होंने चेयरमैन-मेंबर के नाम सुझाए थे, 2020 में डिलिमिटेशन कमीशन की चेयरपर्सन बनीं, जो लोकसभा-विधानसभा सीटें बांटने का काम करती है. साल 2022 उत्तराखंड यूसीसी कमेटी का हेड बनाया गया था. इस दौरान उन्होंने यूजीसी का मसौदा तैयार किया था. इसके बाद गुजरात का भी बिल इनके द्वारा ही दिया गया था. अब मध्य प्रदेश का यूसीसी भी रंजना प्रकाश देसाई ही तैयार कर सकती हैं.
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