पेट्रोल-डीजल खरीदने के नियमों में हो गया बड़ा बदलाव, सरकार ने लगाई नई पाबंदियां

Industrial Petrol And Diesel: दुनियाभर में ईरान और अमेरिका जंग का सीधा असर देखने को मिल रहा है. इसके असर अब आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है. एक तरफ महंगाई की मार तो दूसरी तरफ पर्याप्त फ्यूल न मिलने से लोग काफी परेशान हैं. इन सब के बीच अब केंद्र सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की बिक्री को लेकर नया आदेश जारी किया है.

सरकार के फैसले के तहत अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता सामान्य पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल नहीं खरीद सकेंगे. उन्हें अपनी जरूरत का ईंधन केवल बल्क सप्लाई व्यवस्था या उपभोक्ता पंपों के जरिए लेना होगा. सरकार के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी. इस अवधि के दौरान यदि कोई नया आदेश जारी नहीं होता है तो नियम प्रभावी रहेंगे.

क्‍या हैं नए नियम?
नए नियमों में यह भी कहा गया है कि किसी भी ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक हाई-स्पीड डीजल नहीं बेचा जाएगा. इसके अलावा खरीदे गए डीजल की आगे पुनर्बिक्री (रीसेल) पर भी रोक रहेगी.

इस फैसले के पीछे का क्या है मकसद
सरकार का मानना है कि कई बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता खुदरा पंपों से अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीद रहे थे, जबकि उनके लिए अलग बल्क खरीद व्यवस्था मौजूद है. इससे खुदरा उपभोक्ताओं के लिए बनाई गई मूल्य व्यवस्था पर असर पड़ रहा था. इसी कारण ईंधन की खरीद और वितरण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.

क्‍या होगा फैसले का असर
इस फैसले का असर उन उद्योगों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है जो बड़े पैमाने पर डीजल और पेट्रोल का उपयोग करते हैं. उन्हें अब अपनी ईंधन खरीद प्रणाली में बदलाव करना होगा और बल्क सप्लायर्स के माध्यम से ईंधन लेना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत और लॉजिस्टिक व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है.

हालांकि आम वाहन चालकों, किसानों और रोजमर्रा के उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

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