Chhattisgarh News: 12 हजार रुपए की रिश्वत पड़ी महंगी, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा, विभाग ने किया बर्खास्त

अंबिकापुर. एरियर्स भुगतान के नाम पर 12 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकडे गए शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड दो कर्मचारी को जिला शिक्षा अधिकारी ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है. डीईओ ने यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई कार्रवाई के मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बलरामपुर रामानुजगंज द्वारा सुनाई गई सजा के बाद की गई है. कोर्ट ने आरोपी सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी रिश्वत लेने के मामले में दोषी मानते हुए 3 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रूपए के अर्थ दंड से दंडित किया गया है.

वाड्रफनगर इंजानी शासकीय उमावि में पदस्थ व बीईओ कार्यालय में संलग्न सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 13 अगस्त 2024 को 12 हजार रुपए की रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में आरोपी गौतम सिंह आयम को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था. जेल भेजने के बाद शासकीय सेवक द्वारा 48 घंटे से अधिक अवधि तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने के कारण कलेक्टर के निर्देश पर 21 अगस्त 2024 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था. इस मामले में 29 जुलाई को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बलरामपुर रामानुजगंज द्वारा विशेष आपराधिक प्रकरण (भ्रष्टाचार निवारण) में 15 मई निर्णय देते हुए आरोपी को दोषी माना.

20 हजार रुपए मांगी थी रिश्वत
कोर्ट में यह सिद्ध हुआ कि आरोपी गौतम सिंह आयम द्वारा प्रार्थी नितेश रंजन पटेल से एरियर्स भुगतान के नाम पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई और 12 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए. कोर्ट ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम, 2018) की धारा 7 के तहत दोषी मानते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है.

अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास से दंडित किया गया है. डीईओ कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाई में यह उल्लेख किया गया है कि गौतम सिंह आयम को न्यायालय द्वारा दोषी मानते हुए सजा दी गई है इसलिए पृथक से विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं है. ऐसे में डीईओ ने छग सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (9) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा माननीय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम द्वारा दी गई सजा के आधार पर शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है.

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