Breaking News

रेलवे की मनमानी! पेंड्रारोड स्टेशन में चाय के नाम पर ओवरचार्जिंग, RTI में भी नहीं दी रेट लिस्ट

Railway Tea Stall Overcharging Issue: पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर चाय की कीमत और मात्रा को लेकर दर्ज शिकायत अब रेलवे की कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है. 10 अगस्त 2026 को रेल मदद पर शिकायत संख्या 2026081003229 दर्ज की गई थी. शिकायत कैटरिंग और वेंडिंग सर्विस के तहत ओवरचार्जिंग से संबंधित थी. रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार बाद में शिकायत को ‘Closed’ कर दिया गया.

पेंड्रारोड स्टेशन में चाय के नाम पर ओवरचार्जिंग
रेलवे की जांच रिपोर्ट के अनुसार पेंड्रारोड स्टेशन के फूड प्लाजा पर विक्रेता द्वारा 90 एमएल की चाय दी जा रही थी, जबकि निर्धारित मात्रा 120 एमएल बताई गई. रेलवे ने संबंधित विक्रेता को चेतावनी जारी करते हुए भविष्य में 120 एमएल चाय उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. 13 अगस्त 2026 के पत्र में भी निर्धारित मात्रा सुनिश्चित करने की बात कही गई.

लेकिन सवाल यह है कि जब रेलवे की जांच में निर्धारित मात्रा से कम चाय दिए जाने की बात सामने आई, तो कार्रवाई केवल चेतावनी तक ही क्यों सीमित रही? मामले में एक और अहम बात सामने आती है. शिकायतकर्ता के अनुसार विक्रेता ने बाद में चाय के पैसे वापस कर दिए. ऐसे में सवाल उठता है कि पैसे वापस करने की जरूरत क्यों पड़ी? यदि वसूली में कोई गलती नहीं थी, तो पैसा वापस क्यों किया गया? और यदि गलती थी, तो क्या विक्रेता के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई की गई? उपलब्ध कार्रवाई रिपोर्ट में इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती.

रेलवे अधिकारियों की ऑडियो हुई वायरल
इस पूरे मामले से जुड़ी फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी शिकायतकर्ता द्वारा इस खबर के साथ सार्वजनिक की जा रही है. रिकॉर्डिंग में शिकायत को लेकर रेलवे अधिकारियों और विक्रेता से संबंधित बातचीत सुनी जा सकती है. शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत के दौरान उसे विक्रेता से बात करने के लिए कहा गया. उसका यह भी आरोप है कि बाद में शिकायत वापस लेने के लिए विक्रेता की ओर से संपर्क किया गया। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है; इसलिए रिकॉर्डिंग में कही गई बातों को संबंधित पक्ष के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए.

शिकायतकर्ता के अनुसार फोन पर मुख्य वाणिज्यिक निरीक्षक की ओर से यह भी कहा गया कि रेलवे में पांच रुपये की चाय बिक्री का प्रावधान नहीं है और संबंधित स्थान पर 10 रुपये की फ्लेवर टी की रेट लिस्ट प्रदर्शित थी. लेकिन यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है. यदि 10 रुपये की अधिकृत रेट लिस्ट वास्तव में मौजूद थी, तो RTI में उसकी प्रमाणित प्रति क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई?

RTI में भी नहीं दी रेट लिस्ट
RTI के माध्यम से 10 अगस्त 2026 को लागू अनुमोदित मेन्यू एवं टैरिफ, खाद्य-पेय पदार्थों की कीमत, GST, जांच अधिकारी, पूरी जांच रिपोर्ट, विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई, लाइसेंस/कॉन्ट्रैक्ट, शिकायत बंद करने की स्वीकृति, लागू रेट लिस्ट और अन्य संबंधित जानकारियों सहित 15 बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी. रेलवे के 19 अगस्त 2026 के जवाब में संबंधित जानकारी IRCTC से जुड़ी बताते हुए आवेदन के संबंधित बिंदुओं को RTI अधिनियम की धारा 6(3) के तहत क्षेत्रीय प्रबंधक, IRCTC को भेजने की बात कही गई.

यानी जिस रेट लिस्ट का हवाला फोन पर दिए जाने का दावा किया जा रहा है, वही रेट लिस्ट RTI के जरिए सामने नहीं आई. ऐसे में मूल सवाल अब भी बरकरार है,उस दिन वास्तव में कौन-सी चाय किस कीमत पर बेचने की अनुमति थी?

सवाल सिर्फ विक्रेता पर नहीं, बल्कि रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर भी है. यदि स्टेशन पर निर्धारित 120 एमएल के बजाय 90 एमएल चाय दी जा रही थी, तो नियमित निरीक्षण में यह अनियमितता पहले क्यों नहीं पकड़ी गई? रेलवे स्टेशनों पर खाद्य एवं पेय विक्रेताओं की नियमित जांच कितनी बार होती है? क्या प्रत्येक निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार की जाती है? क्या इस विक्रेता के पिछले निरीक्षण और शिकायतों का रिकॉर्ड भी देखा गया?

रेलवे की मनमानी आई सामने
सबसे बड़ा सवाल शिकायत बंद किए जाने को लेकर है. शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने रेलवे की प्रतिक्रिया से संतुष्टि व्यक्त नहीं की थी और संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार कर रहा था. इसके बावजूद शिकायत Closed कैसे हुई?

पूरी कार्रवाई को देखने पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सिस्टम शिकायत का वास्तविक समाधान करने के बजाय मामले को चेतावनी, पैसे की वापसी और शिकायत बंद करने तक सीमित कर रहा है? क्या इससे विक्रेता को राहत मिलती दिखाई नहीं देती? यदि अनियमितता की पुष्टि हुई थी, तो जवाबदेही किसकी तय हुई,यह भी स्पष्ट होना चाहिए.

कार्रवाई पर उठे सवाल
यह मामला अब चाय के कुछ रुपये का नहीं, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर निर्धारित मात्रा, अधिकृत कीमत, रेट लिस्ट की पारदर्शिता, नियमित निरीक्षण और शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है. रेलवे से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है,विक्रेता ने पैसे क्यों लौटाए? 90 एमएल चाय मिलने के बाद वास्तविक कार्रवाई क्या हुई? 10 रुपये की फ्लेवर टी की अधिकृत रेट लिस्ट कहां है? RTI में वह उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई? और जब शिकायतकर्ता कार्रवाई का इंतजार कर रहा था, तो शिकायत को Closed किस आधार पर किया गया?

आखिर सवाल यह है, अगर जांच में अनियमितता सामने आने के बाद भी कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रहे, तो जवाबदेही किसकी है और यात्री की शिकायत का वास्तविक समाधान कहां है?

Check Also

Mohan Bhagwat Bilaspur Visit: बिलासपुर पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत, छत्तीसगढ़ में संगठन के पुनर्गठन पर होगी बड़ी चर्चा?

Mohan Bhagwat Bilaspur Visit 2026: बिलासपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *