सुबोध कहे या कुबोध कहें आजकल इस बात की बड़ी चर्चा है कि ऐसा कौन सा बिजली की खपत किस साल छत्तीसगढ़ में हुई की सभी घर में बिजली का बिल पिछले साल के इसी महीने की तुलना में लगभग 30 से 40% बढ़ा हुआ मिला प्रदेश के वासी इस बात पर हैरान थे कि उनके घर में ऐसा कौन सा नया बिजली का सामान लगा लिया गया है.
जिसके चलते स्मार्ट मीटर तेजी से केवल घूम नहीं रहा है बल्कि चक्कर लगा रहा है आखिर यह चक्कर क्या है यह बात समझने के लिए मोर बिजली ऐप छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐप बनाया है, इस ऐप में पिछले साल से लेकर इस साल तक आपके घर में कितनी बिजली की खपत हुई है इसकी जानकारी दिखती है इस संवाददाता कम से कम 300 लोगों के मोर ऐप को कंगाल और यह पाया कि पिछले साल जिस माई माह में उनका बिल केवल 5000 से 7000 तक आया था.
वह 2026 में इसी महीने में बढ़कर 12000 से 19000 हो गया लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि अचानक ऐसा क्या हो गया जिसके चलते उनके घर की बिजली का बिल डेढ़ गुना से लेकर 2 गुना तक बढ़ गया इसी बीच विपक्षी पार्टी ने हंगामा मचाया स्मार्ट मीटर के चलने के कारण लोगों के घर की बिजली का बिल बढ़ा हुआ आया है जबकि सच क्या है यह जानना बहुत जरूरी है,
बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को एक नंबर दिखाने के लिए एक नंबर के अधिकारी ने बहुत बड़ा खेल और सॉफ्टवेयर में ऐसा सिस्टम डाला गया जिसके चलते सारे स्मार्ट मीटर में बिजली के बिल बाढ़ करके डेढ़ गुना से 2 गुना हो गया उपभोक्ताओं ने इस बारे में पूरे प्रदेश भर में अपनी शिकायतें यह कहकर दर्ज करवाई कि उनके घर का मीटर बिगड़ा हुआ है.
जिसके चलते बिजली का बिल ज्यादा आया है इस बारे में खाना पूर्ति कर ली गई और यह बता दिया गया कि आपके द्वारा बिजली के खपत जितनी की गई है उतने का बिल भेजा गया है जबकि सच यह है कि एक नंबर के अधिकारी के कुबोध के चलते हुए प्रदेश का सुबोध हो गया है कहा जाता है कि अगर कुछ स्तरीय तकनीकी संस्थान से इस मामले की जांच कराई जाए तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आने की आशंका है क्योंकि जब प्रदेश में पिछले साल इसी मई महीने में विरोध बावजूद और उपभोक्ताओं के द्वारा ज्यादा विद्युत खपत वाली मशीन नए लगाए जाने के बावजूद भी बिजली का बिल करंट मारने वाला रहा तो यह जांच का विषय है कि आखिर ऐसी कौन से उपकरण प्रदेश वासियों के घर में लग गए थे.
जिसके चलते बिजली का बिल इतना बढ़ गया की गरीब से लेकर गरीबों तक और अमीर से लेकर आमिर तक चिंता में पड़ गया बताया यह भी जाता है कि इस प्रकार की बढ़त को अगले माई महीना पिछले साल की इसी महीने की तुलना में बराबर कर दिया गया ताकि हल्ला ना मच सके यह बात भी प्रमाणित हो चुका है की बिजली का बिल घर से नहीं बल्कि विद्युत मंडल के एक नंबर के अधिकारी के दिमाग के चलते खेला गया खेल है।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter