कांग्रेस के एक नेता का जन्मदिन शक्ति परीक्षण के रूप में कांग्रेस को ही दिखाया गया। इस जन्मदिन पार्टी में स्तुतिगान भी हुआ। प्रदेश के हारे हुए कांग्रेस के कद्दावर नेता ने गान किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष कैसा हो? भूपेश बघेल जैसा नहीं, भूपेश बघेल ही हो। कांग्रेस में बवाल हो गया। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बेंज को लगा कि दीपक बुझाने की कोशिश किसी महाज्ञानी के द्वारा की जा रही है।बातों बातों में कह दिया कि उन्हें कमजोर न आंका जाए।
ये मुद्दा न तो ठंडा होना था न ही हुआ। जिला अध्यक्षो की बैठक में फिर बवाल हो गया।स्तुतिगान पार्ट 2 चालू हुआ और समर्थक और विरोधी आक्रामक हो गए।कहां “वोट चोरी”अभियान चलाने के लिए इकट्ठा हुए थे। आपस में ही लड़ बैठे। एक ने कहा प्रशंसा हुई है, दूसरे ने कहा अनुशासनहीनता हुईं है। खैर , ये बात मान ली गई कि अनुशासनहीनता हुई है और छ्ब्बे बनने गए चौबे जी को दुबे बनाए जाने की बात हो गई। देखते है कि कब चौबे जी कारण बताओ नोटिस मिलता है?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सही मायने में कद्दावर नेताओं को देखे तो भूपेश बघेल एक नंबर पर है।कारण है आलाकमान की दो बड़ी नेत्री उनके पीछे खड़ी है। बाकी दिग्गजों में चरणदास महंत दूसरे, दीपक बेंज तीसरे और नेपथ्य में चौथे नंबर पर बाबा साहब है। इनमें एक तरफ और तीन दूसरे तरफ है। दूसरे तरफ वालो का ये मानना है कि पहले वाले के गलत खेल के कारण पार्टी विपक्ष में बैठी है जिसके नेता चरणदास महंत है।भविष्य में अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो चरण दास महंत ही अगले मुख्यमंत्री हो सकते है।इस बार की बोल लड़ाई में चरण दास महंत ने भी टिप्पणी की “नेताओं को अपने चमचों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है।”
कार्यकर्ता और चमचों में फर्क होता है। कार्यकर्ता पार्टी के होते है, चमचे नेताओं के होते है। भूपेश बघेल का चमचा कौन है? इस प्रश्न का उत्तर भी किसी महाज्ञानी के पास ही होगा।प्रश्न ये भी है क्या चौबे जी छब्बीस होते है या दुबे बनते है? छत्तीसगढ़ कांग्रेस अजीत जोगी पार्ट 2 के दौर से गुजर रही है। एक बार अजीत जोगी के समान सरकार चलाए और सत्ता से बाहर हो गए। अजीत जोगी होशियार थे। ढेबर परिवार को आगे कर जग्गी हत्याकांड को अंजाम दिए थे।
भूपेश बघेल ने भ्रष्टाचार की खेती की। हर विभाग में घोटाला करवाया। दस बीस आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की टोली बनाई। अरबों रुपए का घोटाला है। सौ से ऊपर जेल यात्री बन चुके है जिसमें भूपेश बघेल का पुत्र भी शामिल है। अब ऐसे लोगों को कांग्रेस की सत्ता सौंपने का मतलब अगले चुनाव में फिर से बंटाधार होना तय है। प्रश्न फिर सामने है ।दिल्ली वालो की पसंदगी क्या है? उत्तर है जिसे महाज्ञानी कहते है कि। संगठन के शीर्ष पर बर्थडे बॉय ही ठीक है।
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