रायपुर। क्वांर नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। अब दशहरा और दीवाली की रौशनी में लोग अपने घरों को जगमगाने की तैयारी रहे हैं। रौशनी से सभी को लगाव हैं। अपनी छाया देखकर वह प्रफुल्लित होता हैं। ऐसे में बिजली के रेट में वृद्धि के बाद वह थोड़ा ठिठका सा महसूस कर रहा है। उनका मानना है कि पिछली बार की दीवाली में जो रोशनी थी वह कुछ कम ही होगी। राम राज्य में रावण की एंट्री के बाद लगने लगा है कि अंधरे में ही रहे ताकि अपना छाया भी किसी को न दिखे।
सत्ता के मद में झूमने वालों को सुझाव देने से पहले उसके नफा नुकसान को देखने के बजाय तात्कालीन लाभ को ही देखा जाता है। ऐसा ही मामला बिजली में मिलने वाली सहुलियत को लेकर हुआ। बिना किसी को विश्वास में लिए सीधे कट कर दिया गया। प्रदेश में जब अपने काम सधता रहा, तब तक ये साहब यहां रहे। उसके बाद सरकार बदलते ही केंद्र की शरण में चले गए। वहां पर भी उनके लोग थे। ऐसा लगा कि वे वहां जम जाएंगे, लेकिन एक ऐसा प्रकरण हुआ, जिसमें पूरे देश के छात्र आक्रोशित हो गए। सबने सफाई दी, पर साहब पर उंगली उठी। वे वहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर फिर यहां आ गए।
अब यहां आने के बाद उन्होंने खेला शुरू किया। पहले ही शॉट में जनता को पॉवर पर मिलने वाली रियायत हटाई, उद्योगों की रियायत बढ़ा दी। एक दूसरा वाक्या उनका यह है कि नया रायपुर में पॉवर कंपनी और अन्य बिजली कंपनियों का दफ्तर बनाने की बात आई। 300 करोड़ के बहुमंजिला बिल्डिंग बनाने के लिए विनियामक आयोग की अनुमति लेनी थी। विनियाकम आयोग के अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। सहाब ने इसे अपने बड़े प्रोजेक्ट में अंडंगा मानते हुए बिना एनओसी के ही उसका लोकार्पण करावा दिया।
बताया गया कि भवन के दीवारों से सौर उर्जा बिना सूर्य के भी पैदा हो सकेगी। विनियामक आयोग के मुखिया को अब कैसे भी करके परेशान कर हटाने की साजिश होने लगी तो उन्होंने मौका देखकर दूसरे राज्य की ओर रुख कर लिया। और इस्तफा देकर चले गए। अब सहाब अपने पसंद और फेवर के अफसर को बिठाकर विद्युत भवन की एनओसी लेकर आराम से इसे अपने शर्ताें पर तैयार कर सकेंगे। दोनों वाक्या को देखकर लगता है कि रात राज्य में कैसे षड्यंत्र कर छत्तीसगढ़िया को परेशान किया जाता है।
वैसे भी अब दीवाली आने वाली है ऐसे में रौशनी कम करके सही राम के राज में रावण की एंट्री को स्वीकार कराना होगा। अब सहाब को देखकर लगने लगा है कि जिस पुरानी सत्ताधीश ने उन्हें अपने पांच साल में गले लगाया। वहीं उनकी लंका नाश कर गया। अब विष्णु के सुशासन को जनता से जुड़े मामलों से दूर हटाकर उनकी भी इतिश्री करने का बी प्लान तैयार करने में लगे हैं।
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