सरकार के ब्यूटी पार्लर में शायद ऐसा क्यों महसूस हुआ कि सरकार के चेहरे को सुंदर न दिखाकर बदसूरती ज्यादा परोसी जा रही है ? जिसके चलते चाल भी लड़खड़ा रही है और चरित्र पर भी बट्टा लग रहा है। सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी और सत्ता में बीते बीस साल में सत्ता के मठाधीशों के मीडिया से करीबी के चलते सरकार के चेहरे को जाने वाले साहब खूबसूरत नहीं बना पाए जबकि ब्यूटी पार्लर और ब्यूटी प्रोडक्ट डिपार्टमेंट दोनों उन्हीं के पास था।
अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बीते दो सालों में एक साल विशेष के नौकरशाहों ने ऐसी बिसात बिछाई जिसके चलते शुरुआती जीत के बाद लगातार हार होते जा रही है। बताया जाता है कि सरकार के क्रिया कलाप को जनता तक पहुंचाने में जन से संपर्क रखने वाला विभाग दिन ब दिन ऐसा कुछ नहीं परोस सका जिससे सरकार का चेहरा सुंदर दिख पाता। इस बात को लेकर नौकरशाह और गैर नौकरशाह के बीच ठन गई। दरबार में दरबारी कितने असरकारक होते है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि रवि के आभा के सामने दया याचना किनारे लग गए।
जन संपर्क विभाग में ये बात है कि स्थानीय खबर नवीस दर किनार हो रहे थे।हवाई जहाज से आने वाले बाहरी लोग भले ही पांच सितारा होटल में बैठकर स्तुति बाहरी समाचार पत्रों में छपवा ले लेकिन वोट तो राज्य के नागरिकों से ही मिलना है।
पंडितों की लड़ाई का नतीजा सामने आ गया है। जन संपर्क में नए सचिव के रूप में किसी जमाने में परिवहन मंत्रालय का काम देखने वाले डॉक्टर साहब को शल्य चिकित्सा की जिम्मेदारी मिली है। ब्यूटी पार्लर में कॉस्मेटिक सर्जरी होगी। कार्यालय के पंडित जी का कहना है कि जल्दी ही परिवर्तन की लहर चलेगी।अभी और लोग अंदर बाहर होंगे।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter