अनिल अंबानी की मुश्किलें नहीं हो रहीं कम, अब Rcom मामले में SC से मिला नोटिस

शहूर उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. क्योंकि, रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम), इसकी समूह कंपनियों और उनके प्रमोटर से जुड़े कथित बड़े बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई, ईडी, अनिल अंबानी और अन्य को नोटिस जारी किए हैं. मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने जनहित याचिका दायर करने वाले और पूर्व केंद्रीय सचिव ई एएस शर्मा की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया और 3 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा.

हो सकता है बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला
शर्मा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह भारत के इतिहास का संभवतः सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह भारत के इतिहास में संभवतः सबसे बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड से संबंधित है. एफआईआर 2025 में ही दर्ज की जाएगी, यह फ्रॉड 2007-08 से चल रहा है. पीठ ने पूछा कि आपने प्रतिवादियों को याचिका की एक प्रति नहीं दी? भूषण ने जवाब दिया कि हमें सीबीआई और ईडी से स्टेटस रिपोर्ट चाहिए. इसके बाद कोर्ट ने प्रतिवादियों को औपचारिक नोटिस जारी किया. बता दें कि अनिल अंबानी की स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस इन्फ्रा 4 फीसदी की गिरावट के साथ तो रिलायंस पावर डेढ़ फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं.

जांच की मांग
सरमा की याचिका में कहा गया है कि सीबीआई द्वारा 21 अगस्त, 2025 को दर्ज की गई एफआईआर और संबंधित ईडी की कार्यवाही कथित गड़बड़ी के केवल एक छोटे से हिस्से को ही कवर करती है. इसमें दावा किया गया है कि फोरेंसिक ऑडिट और व्यापक धोखाधड़ी का संकेत देने वाली स्वतंत्र रिपोर्टों के बावजूद, एजेंसियों ने बैंक अधिकारियों और नियामकों की भूमिका की जांच नहीं की है. याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें पहले ही धन के व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग के निष्कर्षों पर गौर किया गया था.

किस तरह​ का हुआ फ्रॉड
आरकॉम और उसकी सहायक कंपनियों रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने कथित तौर पर 2013 और 2017 के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक कंसोर्टियम से 31,580 करोड़ रुपए का लोन प्राप्त किया. एसबीआई द्वारा कराए गए एक फोरेंसिक ऑडिट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खुलासा हुआ है. ऑडिट में कथित तौर पर बंद घोषित किए गए बैंक खातों से लेनदेन को भी चिह्नित किया गया है, जिससे वित्तीय विवरणों में हेराफेरी की आशंका बढ़ गई है.

ऐसे हुई हेराफेरी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नेटिजन इंजीनियरिंग और कुंज बिहारी डेवलपर्स जैसी फर्जी संस्थाओं का इस्तेमाल धन की हेराफेरी और मनी लॉन्डिरिंग के लिए किया गया, और देनदारियों को बट्टे खाते में डालने के लिए फर्जी वरीयता-शेयर स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया, जिससे कथित तौर पर 1,800 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ. इसमें दावा किया गया है कि ये सामग्रियां नुकसान को छिपाने और पब्लिकली फंड के दुरुपयोग को छुपाने के लिए जानबूझकर, निरंतर प्रयास को दर्शाती हैं.

पब्लिक के पैसों का दुरुपयोग
इस जनहित याचिका में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कई संस्थाओं में सार्वजनिक धन के व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग, वित्तीय विवरणों में हेराफेरी और संस्थागत मिलीभगत का आरोप लगाया गया है. इसमें कहा गया है कि 21 अगस्त को सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई, कथित धोखाधड़ी के केवल एक छोटे से हिस्से को संबोधित करती है.

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