Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल हो या असम विधानसभा का चुनाव, दोनों राज्यों में नेताओं की तेजाबी जुबान चुनावी इतिहास के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर रही है. हिमंता का “खेड़ा का पेड़ा” बनाना हो या ममता दीदी का ‘दोमुंहे सांप’ से बचने की नसीहत. या फिर मल्लिकार्जुन खड़गे का क़ुरान की आयत का हवाला देकर ‘जहरीले सांप को मारने’ और ‘गुजरातियों को अनपढ़’ बताने वाला बयान.
2026 में ये बयान बदज़ुबानी का नया आयाम सेट कर रहे हैं. हालांकि, यह बात दिगर है कि सभी दल एक दूसरे के बयानों के खिलाफ चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत भी कर रहे हैं. लेकिन, गौरतलब है कि नेताओं की फरियाद सुनने वाला आयोग भी आरोपों के कटघरे में खड़ा है. देश के निर्वाचन आयोग के हैंडल से किया गया एक ट्विट चौतरफ़ा चर्चा का विषय बन गया. इस ट्वीट में चुनाव आयोग ने सीधे पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी को संबोधित करते हुए चेतावनी दे डाली. विपक्ष के तमाम नेताओं ने इसकी मुखालफत कर डाली. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तो यहां तक कह डाला कि चुनाव आयोग को अपना नाम बदलकर बीजेपी रख लेना चाहिए.
TMC नेता और EC के अधिकारियों बीच तू-तू मे-मे
बुधवार का दिन पूरी तरह से चुनाव आयोग पर ही फ़ोकस्ड रहा. दिन की शुरुआत जहां चुनाव आयोग के विवादित ट्विट से हुई, वहीं टीएमसी नेताओं का आयोग के प्रमुख से मुलाक़ात ने भी आग में घी डालने का काम कर दिया. टीएमसी के नेता दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे. टीएमसी नेता ब्रेक ओब्रायन के नेतृत्व में पहुंचा दल आयोग से बाहर निकलते ही बौखलाया हुआ था. मीडिया से बातचीत करते हुए डेरेक ओब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रतिनिमंडल को ‘गेट लॉस्ट’ यानी दफ़ा हो जाओ…कहते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया. दरअसल, टीएमसी नेता पश्चिम बंगाल में अधिकारियों को हो रहे तबादले का मुद्दा चुनाव आयोग के सामने रख रहे थे. जानकारी के मुताबिक इसी दौरान दोनों तरफ़ से तू-तू मे-मे शुरू हो गई. वहीं चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ओ’ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिल्लाया और उनसे चुप रहने को कहा. जिस पर CEC ने उन्हें आयोग के कमरे की मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया.’
TMC नेताओं ने चुनाव आयोग से की शिकायत
टीएमसी के बाद बीजेपी के नेताओं का भी एक दल अपनी शिकायत लेकर दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंचा. इसमें केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, वीरेंद्र खटिक, अरुण सिंह और ओम पाठक शामिल थे. मुलाकात के बाद ये नेता बाहर आए और मीडिया से मुख़ातिब होते हुए अपनी शिकायतों के बारे में बताया. वीरेंद्र खटिक ने अभिषेक बनर्जी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बल प्रयोग करने की बात कह रहे हैं. उन्होंने आयोग से शिकायत की कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी अपने बयानों से लोगों को भड़का रहे हैं, लिहाज़ा उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए. ममता बनर्जी ने भी बीजेपी को दोमुंहा सांप बताकर मारने की बात कही है. वहीं, अर्जुनराम मेघवाल ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान का हवाला देते हुए उनपर कार्रवाई की मांग की. खड़गे ने असम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए क़ुरान का हवाला देते हुए ‘ज़हरीले सांप को मारने’ की बात कही थी. साथ ही गुजरातियों को अनपढ़ बताया था. मेघवाल ने कहा कि हमने आयोग से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है.
पश्चिम बंगाल का चुनाव ऊपर से भले ही मात्र एक चुनावी जंग के तौर पर दिखाई दे रहा है, जहां नेता चुनावी जनसभाओं में चुनावी ज़हरीले बोल बोल रहे हैं. लेकिन, यह ज़हरीले बोल असल में राजनीतिक ज़मीन के भीतर उबल रहे लावा का नतीजा है, जो आगामी दिनों में और ज़्यादा तेज़ाबी होने वाला है.
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