Bihar Detergent Poisoning Incident: बिहार कई मामलों में देश में चर्चा में बना रहता है, चाहे प्रदर्शन हो या फिर नेता से सवाल हर बार विरोध का तरीका भी यहां हर जगह से जुदा नजर आता है. लेकिन, कई कारनामें यहां ऐसे भी होते हैं जिनके कारण बात लोगों की जान पर आ जाती है. इस बार बच्चों के साथ इसी तरह का मामला सामने आया है. जिसके कारण अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई लोगों को नमक और डिटर्जेंट के बीच का अंतर ही नहीं पता है?
बिहार के नालंदा जिले से स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ गई. नूरसराय प्रखंड के परासी स्थित एक सरकारी स्कूल में खाने के दौरान हुई गलती के चलते 34 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई. सभी प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की.
नमक की जगह खिला दिया डिटर्जेंट
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को स्कूल में बच्चों को चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी. खाना खाने के दौरान कुछ बच्चों ने खाने के साथ अतिरिक्त नमक मांगा था. इसी दौरान एक रसोइया ने कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर उठा लिया. उसे नमक समझकर खाने में डाल दिया.बच्चों ने वह डिटर्जेंट डला खाना खा लिया, यही वजह रही कि बच्चों की तबियत बिगड़ गई.
खाना खाने के कुछ समय बाद बच्चों ने गले और पेट में दर्द की शिकायत करनी शुरू कर दी. स्कूल प्रबंधन को जब गलती का पता चला तो बच्चों को तत्काल प्राथमिक राहत देने की कोशिश की गई. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.
स्कूल में उस समय कुल 132 बच्चों को भोजन परोसा गया था, जिनमें से 34 बच्चों की तबीयत खराब हुई अधिकारियों के अनुसार, सभी बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं.
खाने की जांच के बाद हुआ खुलासा
प्रशासन ने खाने के नमूने की जांच कराने की बात कही है. अधिकारियों के मुताबिक, मिड-डे मील की आपूर्ति एक केंद्रीय रसोई के माध्यम से की जाती है, जहां से आसपास के कई प्रखंडों के स्कूलों में भोजन भेजा जाता है.
घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी अस्पताल पहुंचे. बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी अस्पताल जाकर बच्चों का हाल जाना. इसके साथ ही डॉक्टरों को उनके समुचित इलाज के निर्देश दिए.
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