मटनार, मोहमेला एवं पैरी परियोजनाओं के निर्माण का मार्ग हुआ प्रशस्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग की तीन महत्त्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं बस्तर की मटनार-देउरगांव बहुउद्देशीय उद्वहन बैराज परियोजना, रायपुर जिले की मोहमेला–सिरपुर बैराज परियोजना तथा गरियाबंद जिले की पैरी परियोजना अंतर्गत सिकासार–कोडार जलाशय लिंक परियोजना को उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के महत्वपूर्ण निर्णय से बड़ी कानूनी मजबूती मिली है। इससे राज्य की इन बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में तेजी आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
4 अगस्त को पारित निर्णय में पैरी-सिकासार लिंक परियोजना से संबंधित याचिका को पूर्णतः निरस्त करते हुए जल संसाधन विभाग द्वारा अपनाई गई निविदा प्रक्रिया, पात्रता शर्तों एवं तकनीकी मूल्यांकन को विधिसम्मत एवं नियमों के अनुरूप माना। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि निविदा आमंत्रण प्राधिकरण अपनी तकनीकी एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं का सर्वोत्तम निर्णायक है तथा न्यायालय केवल निर्णय प्रक्रिया की वैधता की समीक्षा कर सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा, अनुमानित लागत के दो गुना औसत वार्षिक टर्नओवर की पात्रता शर्त न तो मनमानी है और न ही संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करती है। विशेषज्ञ समिति द्वारा किए गए तकनीकी मूल्यांकन में भी न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए विभागीय कार्यवाही को नियमत: माना।
देश की अग्रणी निर्माण एजेंसियों ने भाग लिया
इन परियोजनाओं में देश की अग्रणी निर्माण एजेंसियों ने प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया में भाग लिया। मटनार-देउरगांव संयुक्त परियोजना में एनसीसी लिमिटेड, हैदराबाद, दिलीप बिल्डकॉन एवं ऋत्विक कंस्ट्रक्शन की बोलियां प्राप्त हुईं, जिनमें एनसीसी लिमिटेड की बोली सबसे कम (एल-1) पाई गई। मोहमेला–सिरपुर बैराज परियोजना में एलसीसी अहमदाबाद, ओम मेटल्स इंफ्राप्रोजेक्ट्स एवं दिलीप बिल्डकॉन की बोलियां प्राप्त हुईं, जिनमें ओम मेटल्स एल-1 रही। वहीं पैरी–सिकासार लिंक परियोजना में एनसीसी लिमिटेड, ऋत्विक कंस्ट्रक्शन, दिलीप बिल्डकॉन तथा ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड ने भाग लिया, जिसमें दिलीप बिल्डकॉन की बोली सबसे कम (एल-1) पाई गई।
42 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा
इन परियोजनाओं से प्रदेश की सिंचाई एवं जल संसाधन अवसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। बस्तर की मटनार–देउरगांव बहुउद्देशीय उद्वहन बैराज परियोजना से लगभग 16,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही परियोजना से 21 मेगावॉट जलविद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है, जिससे कृषि के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। मोहमेला–सिरपुर बैराज परियोजना से लगभग 1,800 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी, जबकि पैरी–सिकासार–कोडार लिंक परियोजना के माध्यम से लगभग 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल एवं औद्योगिक उपयोग हेतु जल उपलब्ध कराया जाएगा।
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