कटघोरा। क्षेत्र के चर्चित राज ज्वेलर्स लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के मास्टरमाइंड को कर्नाटक बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया। आरोपी विष्णु राठिया ने महिला बनकर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। बता दें कि इस मामले में दो आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, सरगना विष्णु राठिया कर्नाटक बॉर्डर के हिन्दूपुरम इंडस्ट्रियल एरिया में बतौर मजदूर का काम कर रहा था। मुखबिर की सूचना पर कोरबा पुलिस की विशेष टीम कर्नाटक पंहुची और आरोपी को धरदबोचा। इस मामले में दो आरोपी गोपाल सिंह और परदेशी राम पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
जानिए पूरा मामला
बता दें कि एक जुलाई को छुरीकला के राज ज्वेलर्स में कट्टा अड़ाकर और मिर्ची पाउडर डालकर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया था। प्रार्थी राजकुमार अग्रवाल ने एक जुलाई को ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि दोपहर करीब एक बजे वह अपनी राज ज्वेलर्स दुकान में अकेले थे। इसी दौरान बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल से तीन लोग ग्राहक बनकर पहुंचे। तीनों ने गमछे से चेहरा ढंक रखा था, जिसमें एक महिला के भेष में था।
आरोपियों ने चांदी की अंगूठी दिखाने के बहाने दुकानदार को काउंटर तक बुलाया। एक आरोपी ने दरवाजा बंद कर दिया और दूसरे ने देसी कट्टा छाती पर अड़ा दिया। तीसरे ने आंखों में मिर्च पाउडर डालने का प्रयास किया और बैग में आभूषण भरने लगी। बाहर भीड़ जमा होने से घबराकर तीनों देसी कट्टा और चोरी की मोटरसाइकिल छोड़कर भाग निकले।
जेल में हुई थी तीनों आरोपियों की दोस्ती
आरोपी पुलिस से बचने के लिए जंगल रास्तों का उपयोग कर रहे थे। मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों गोपाल सिंह गोंड (38 वर्ष, निवासी घुचापुर) और परदेशी राठिया (40 वर्ष, निवासी जिलगा बरपाली) को गिरफ्तार किया गया। दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया। वहीं मास्टरमाइंड और तीसरा आरोपी विष्णु प्रसाद राठिया (निवासी कोलगा) फरार था, जिसे कर्नाटक बार्डर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि तीनों पूर्व में हत्या, दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों में सजा काटकर जेल से छूटे थे। जेल में ही इनकी दोस्ती हुई और रिहाई के बाद लूट की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने चोरी की मोटरसाइकिल और देसी कट्टे का उपयोग किया था। इस कार्रवाई में कटघोरा पुलिस टीम का सराहनीय योगदान रहा।
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