आज की ताजा खबर ये है कि सात करोड़ का सरकारी धान चूहे को खिलाने वाला सरकारी मुलाजिम केवल सस्पेंड कर समाचार पत्रों में समाचार छपवा दिया गया है। एक सरकारी कर्मचारी जो सेकंड क्लास अधिकारी हो उसको पूरे सर्विस काल में मुश्किल से दो तीन करोड़ रुपए मिलते है।एक ही साल में खाली चूहे को सात करोड़ रुपए खिलाने वाले ने अकेले चूहे को इतना धान नहीं खिलाया होगा खुद भी खाया होगा।अपने उच्च अधिकारियों सहित नेताओं को परोसा होगा लेकिन फिलहाल अकेले सस्पैंड हुए है।
देखा जाए तो विपक्ष को शानदार मुद्दा हाथ में दिया गया था चूहे को करोड़ों का धान खिलवा कर। कांग्रेस सहित जीरो फिगर वाले अन्य दलों ने चूहे को लेकर खूब कान खींचा था सरकार का। प्रश्न ये भी उठाया गया था कि चूहे जैसे मूक जानवर इतना धान कैसे खा सकता है? जरूर चूहे को बदनाम किया जा रहा है।सरकारी चूहे भी इस मामले में शामिल है। धान के रख रखाव सहित बंटवारे का काम मार्कफेड नाम की संस्था के पास है। इस संस्था के अध्यक्ष और एम डी बनने के लिए तगड़ी फील्डिंग करना पड़ता है। कांग्रेस के शासन काल में ऑफ लाइन कोयला बंटवाने वाले समीर विश्नोई को ये विभाग मिला था। खनिज विभाग में घोटाला करने के एवज में, चपक गए थे। उनके बाद मनोज सोनी आए।
कांग्रेस शासनकाल में 120 क्विंटल देकर 20 रुपए की कमीशन बाजी कर मार्कफेड के एम डी मनोज सोनी और राइस मिल के पदाधिकारी रोशन अग्रवाल को जेल दाखिल हो गए। भाजपा के आते ही कस्टम मिलिंग का रेट जमीन पर ला दिया है।इसके चलते राइस मिलर्स धान उठाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। आज शशि कांत द्विवेदी को जिम्मा मिला है। डा रमन सिंह के जिले से सरोकार रखते है। उनसे उम्मीद बनती है कि धान खरीदी केंद्रों में रखे चौरासी लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण अगले चार महीने में करने के लिए प्रयास करेंगे। मानसून आते तक धान के न उठने से नुकसान होगा। सरकारी चूहे ताक में है कि इस बार भी चूहा कुछ खाए ताकि वे भी अपना पेट भर सके।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter