US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका की ओर से ईरान में नए हवाई हमले किए जाने के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाने का दावा किया है. इससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. यही वजह है कि ऐसा माना जा रहा है कि एक बार फिर जंग भड़क सकती है.
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कई ठिकानों पर हमला किया था. इन हमलों को लेकर अमेरिका ने कहा था कि इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार ढांचे, समुद्री सैन्य क्षमताओं और माइन बिछाने से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया. अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि दो ईरानी सरकारी टैंकरों को निशाना बनाया गया है.
ईरान ने किया अमेरिका पर पलटवार
अमेरिका की तरफ से किए गए इन हमलों का ईरान ने भी पलटवार किया है. ईरान ने बुधवार तड़के मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए. ईरानी सेना ने जॉर्डन में प्रिंस हसन एयरबेस और अमेरिकी मरीन बेस को निशाना बनाने का दावा किया. जॉर्डन ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस ने करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया. बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास हमलों की खबर सामने आई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर तनाव
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है. यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है. यहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ईरान की ओर से होर्मुज में आवाजाही को और सीमित करने की चेतावनी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई. बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 95.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
दोनों देशों में जुबानी जंग तेज
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संघर्ष ईरान-अमेरिका की सीमा से निकलकर पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध का रूप लेगा.
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