Mohan Bhagwat Speech: RSS प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए. यहां उन्होंने कहा कि भारत ‘महाशक्ति’ बनकर नहीं, बल्कि मानवता की निस्वार्थ सेवा के जरिए ‘विश्वगुरु’ बना है. जब भी दुनिया में कहीं भी भारत से मदद मांगी गई है, उसने कभी मना नहीं किया और बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया है. यह हमारी परंपरा है, भारत का DNA है.इसीलिए आपने यह कहावत सुनी होगी, अगर हिंदू जागते हैं, तो दुनिया जागती है’. वे सजीव और निर्जीव दोनों को अपना मानते हैं.हमारी परंपरा हमें सिखाती है कि न केवल विविधता में एकता है, बल्कि विविधता खुद एकता का ही एक रूप है.
मोहन भागवत ने दोस्ती के साथ दुनिया को अपनाएं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग खुले विचारों वाले और ज्ञानी हैं, वे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा को अपनाते हैं. यह विश्वास कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है. हालांकि भौतिक दुनिया में लोग शरीर, आकार और रंग-रूप में अलग हो सकते हैं, लेकिन असल में हम सब एक हैं.
उन्होंने आगे कहा कि इसलिए, दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है. हमें यह ज्ञान मिला है, जो हमें स्थायी खुशी और लंबे समय तक रहने वाली संतुष्टि देता है. उन्होंने कहा कि आज भी बहुत से लोग शरण लेने के लिए भारत आते हैं.
मोहन भागवत ने कार्यक्रम में क्या-क्या कहा?
मोहन भागवत ने कहा कि दो कोई भारत को महाशक्ति कह सकता है, लेकिन यह वैसी महाशक्ति नहीं थी. इसने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्व गुरु’ बनी, न कि महाशक्ति.
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की. उन्होंने पैदल ही हिमालय पार किया, छोटी नावों से दक्षिण-पूर्व एशिया गए. लेकिन, उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया. उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद दिया और सभ्यता से जुड़े मूल्य सिखाए. आज भी जब कोई आम भारतीय किसी देश में जाता है, तो वहां के लोग नमस्कार करते हैं.
बहुत से लोग शरण लेने के लिए भारत आते- भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जब मैं ‘हिंदू’ कहता हूं. तो इस शब्द को किसी खास भाषा, पूजा-पद्धति या जीवन-शैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता.ये सभी चीजें इसमें शामिल हैं. ये इंसानों की विविधताएं हैं. हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं. आगे कहा कि दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर अत्याचार हुआ, तो उसे भारत में ही शरण मिली. कई लोग बाहर से हमलावर बनकर भारत आए.लेकिन वे आज भी अपनी खासियतों के साथ यहां फल-फूल रहे हैं. वे अब भारतीय नागरिक हैं. यहाँ मुसलमान, ईसाई और यहूदी भी कम संख्या में हैं. बहुत से लोग शरण लेने के लिए भारत आते हैं.
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