महादेव याने भोले शंकर, जब तक चुप है तब तक दुनियां कुछ भी करती रहे, चलेगा। अगर उन्हें क्रोध आया तो मानकर चलिए कि सर्वनाश होना तय है। देवो के देव महादेव के नाम पर दुर्ग जिला जहां से एक जाति विशेष के तत्कालीन मुख्यमंत्री भी आते थे उसी जिले से तथाकथित संरक्षण के बल पर एक जूस बेचने वाले ने ऑनलाइन सट्टा को छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से जन्म दिया। इसके पालन पोषण की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों/ सलाहकारों ने भरपूर रूप से किया। ये सभी जान रहे थे कि पांच साल में अरबों रुपए का घोटाला करने के बाद मिलने वाली अवैध राशि को ठिकाना भी लगाना पड़ेगा।
जूस बेचने वाला सौरभ, धीरे से दुबई पहुंच गया और इसके बाद अवैध सट्टा के जरिए पैसा बरसने लगा। तब के आधा दर्जन छत्तीसगढ़िया आईपीएस अफसर संरक्षण देने और बदले में हफ्ता, महीना वसूलने लगे। इनके नाम तो अदालतों में दाखिल सूची में नहीं है लेकिन अब जबकि जूस बेचते बेचते अवैध सट्टा खिलाने वाला सौरभ चंद्राकर कल रायपुर में जांच एजेंसियों के बीच होगा तो बहुत कुछ सच सामने आने वाला है। सीबीआई की माने तो छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन आईपीएस अफसरों के द्वारा हफ्ता महीना वसूली के लिए एक एएसआई और डीएसपी रैंक के अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। बेचारा एएसआई तो सालों जेल में रहने के बाद जमानत में छूटा है दूसरा डीएसपी रैंक का अधिकारी बस्तर से हाल ही में राजधानी के पास ट्रांसफर होकर आया है। दिवाली के समय नये फटाके लेकर सौरभ चंद्राकर आ रहा है। धड़कने बढ़ने के समाचार है।हर हर महादेव
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter