राज्य में फायर स्टेशनों की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है और सरकार को निर्देश दिया है कि जहां फायर स्टेशन नहीं हैं, वहां जल्द व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत एक्शन प्लान पेश करने को कहा है।
मामला उस समय प्रमुखता से सामने आया जब बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण के लिए वर्ष 2020 में मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक जमीन तय नहीं हो सकी। हाल ही में आग की घटनाओं के बाद यह मुद्दा फिर उठा, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार किया।
राज्य सरकार ने अपने जवाब में बताया कि वर्तमान में केवल 9 जिलों में ही पूर्ण रूप से फायर स्टेशन संचालित हैं। बिलासपुर और उरला-सिलतरा में निर्माण कार्य जारी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद कई जिलों में अब भी फायर स्टेशन स्थापित नहीं हो पाए हैं और वहां अस्थायी रूप से होमगार्ड परिसर से संचालन किया जा रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि राज्य में कुल 147 फायर फाइटिंग वाहन उपलब्ध हैं। हाल के वर्षों में नए वाहन जोड़े गए हैं, फिर भी कई क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर संभाग में संसाधनों की कमी बनी हुई है।
फायर स्टेशनों के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा जमीन की उपलब्धता बताई गई है। कई स्थानों पर जमीन मिलने के बावजूद वह शहर से दूर होने के कारण आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय बढ़ने की आशंका रहती है। इस संबंध में सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि उपयुक्त स्थान पर कम से कम 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाए।
नगर निगम ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि फायर सेवाओं की जिम्मेदारी अब उसके पास नहीं है और यह पूरी तरह राज्य के फायर एंड इमरजेंसी सर्विस विभाग के अधीन है। निगम केवल समन्वय और बुनियादी सहयोग की भूमिका निभा रहा है।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में भी फायर सेवाओं में समन्वय की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता को उजागर किया गया है। अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल न होने से आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित होता है।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में फायर विभाग के डायरेक्टर से नया शपथपत्र पेश करने को कहा है, जिसमें अब तक की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना की स्पष्ट समयसीमा बतानी होगी। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को निर्धारित की गई है।
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