MP News: मध्य प्रदेश की पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं. ग्वालियर में तत्कालीन एसपी और डीआईजी भोपाल ग्रामीण राजेश सिंह चंदेल समेत 4 पुलिस कर्मियों पर डकैती और लूट का केस दर्ज किया गया है. ये कार्रवाई जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया के आदेश पर ये कार्रवाई की गई है. आईपीएएस राजेश सिंह समेत 4 पुलिस कर्मियों पर जबरन 30 लाख की वसूली और थाने के सीसीटीवी का फुटेज डिलीट करने का आरोप है.
वसूली और सबूत मिटाने का आरोप
पूरा मामला थाटीपुर थाने का है. आरोप है कि 420 के एक मामले को निपटाने के लिए पुलिस थाने में लगभग 30 लाख रुपये की वसूली की. इसके साथ ही पीड़ित को केस में फंसाने और एनकाउंटर करने की धमकी भी दी.
अनूप राणा ने बताया कि 24 अप्रैल 2023 को पुलिस ने उसे ठाटीपुर थाने में बुलाया था. अनूप का आरोप है कि पुलिस 420 के केस में समझौता करवाने के लिए पहले 5 लाख रुपये ले चुकी थी. इसके बाद 25 लाख रुपये और वसूले. थाने बुलाकर परिवार को भी डराया धमकाया. साथ ही एनकाउंटर में मारने की धमकी दी थी. इसके बाद पुलिस अतिरिक्त रुपये देने का दबाव बनाने लगी. पैसा ना मिलने पर जेल भेज दिया.
‘थाना प्रभारी और SP की मिलीभगत थी’
मामले में ग्वालियर के तत्कालीन एसपी राजेश सिंह चंदेल, ठाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. परिवाद के मुताबिक अनूप राणा ने एसपी से भी मामले में शिकायत की थी. लेकिन अनूप का आरोप है कि थाना प्रभारी और एसपी की मिलीभगत के कारण सुनवाई नहीं हुई.
जेल से छूटने के बाद अनूप ने कोर्ट में पुलिस कर्मियों के खिलाफ अर्जी दी. कोर्ट ने मामले में सीसीटीवी फुटेज भी मंगवाए थे. लेकिन घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले. इसके बाद रेडियो की जांच करवाई गई. जिसमें फुटेज डिलीट करने की बाद सामने आई. 11 मई को कोर्ट ने परिवाद को स्वीकार करते हुए आरोपी पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज करने का आदेश सुनाया.
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