सारंगढ़। रोजगार की तलाश में अपना गांव और परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों या शहरों की ओर जाने की मजबूरी ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी चुनौतियों में से एक है। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका की उम्मीद दिखाई देने लगती है, तो लोगों का अपने गांव में ही भविष्य संवारने का भरोसा भी मजबूत होता है। सारंगढ़ जिले के बैगींडीह गांव के कारीगर मन्नू बघेल की बातों में कुछ ऐसी ही उम्मीद नजर आई। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कलेक्टर पद्मिनी भोई के प्रयासों की सराहना की और कहा कि प्रशासन की पहल से गांव के लोगों में रुककर काम करने की उम्मीद जगी है।
पलायन के बीच गांव में ही रोजगार की उम्मीद
मन्नू बघेल के मुताबिक, बैगींडीह में आर्थिक तंगी और रोजगार की कमी के कारण कई लोगों को काम की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाने के बारे में सोचना पड़ा। कुछ लोग अंडा फैक्ट्री और ईंट-भट्ठों में काम करने के लिए जाने की तैयारी में थे, जबकि उनके अनुसार कुछ लोग गांव छोड़कर जा भी चुके थे।
ऐसे हालात में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और कारीगरों को आगे बढ़ने में मदद देने की प्रशासनिक पहल ने उनमें नई उम्मीद जगाई है। मन्नू का कहना है कि अब गांव में ही आगे बढ़ने और अपने काम को मजबूत करने की संभावना दिखाई देने लगी है।
‘कलेक्टर मैडम की वजह से हमारी उम्मीद जाग रही है’
अपने वीडियो संदेश में मन्नू बघेल ने कलेक्टर पद्मिनी भोई के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब से कलेक्टर गांव और वहां के कारीगरों की समस्याओं पर ध्यान दे रही हैं, तब से लोगों के मन में उम्मीद बढ़ी है।
मन्नू के मुताबिक, प्रशासन की मदद और लगातार प्रयासों से बैगींडीह को आगे ले जाने का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कारीगर अब मजबूरी में गांव छोड़ने के बजाय यहीं रहकर अपने काम को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकेंगे।
पूंजी की कमी बनी चुनौती, आर्थिक मदद से मिल सकता है सहारा
मन्नू बघेल ने अपने संदेश में आर्थिक संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कारीगरों के पास अपना काम बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है। उनके अनुसार, कलेक्टर इस समस्या को समझते हुए आर्थिक सहायता या पूंजी उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही हैं।
मन्नू का मानना है कि यदि कारीगरों को अपना काम बढ़ाने के लिए जरूरी पूंजी मिल जाती है, तो बैगींडीह में रोजगार की संभावनाएं तेजी से विकसित हो सकती हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को अपनी आजीविका मजबूत करने और गांव में रहकर काम करने में मदद मिल सकती है।
पलायन रोकने के लिए स्थानीय रोजगार जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन के पीछे रोजगार की कमी, आर्थिक तंगी और काम बढ़ाने के लिए पूंजी का अभाव जैसे कई कारण होते हैं। ऐसे में केवल अस्थायी राहत देने के बजाय लोगों को टिकाऊ आजीविका से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
बैगींडीह के कारीगर मन्नू बघेल का वीडियो इसी जरूरत को सामने लाता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर, आर्थिक सहायता और कारीगरों को अपने काम के विस्तार के लिए सहयोग मिलता है, तो गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल, मन्नू बघेल ने जिला प्रशासन की पहल को लेकर उम्मीद जताई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय कारीगरों को रोजगार और पूंजी संबंधी सहायता किस तरह मिलती है और इस पहल से गांव में पलायन कम करने के प्रयासों को कितनी मजबूती मिलती है। बैगींडीह के कारीगरों की उम्मीद अब गांव में ही बेहतर आजीविका और अपने काम को आगे बढ़ाने की है।
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