लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों व कर्मियों के साथ उत्पीड़न, धर्म परिवर्तन के दबाव और शिकायतों को दबाने के मामलों में यूपी एसटीएफ की विस्तृत जांच पूरी हो गई है। एडिशनल एसपी प्रमेश शुक्ला द्वारा की गई इस पड़ताल के बाद एसटीएफ चीफ व एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने सात पेज की संस्तुति रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी है। रिपोर्ट में संस्थान के कई विभागों में डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा किए गए कथित कृत्यों का ब्योरा दिया गया है।
छठ पूजा और अंतिम संस्कार में छुट्टी देने पर अपमान का आरोप
एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक पैथोलॉजी और अन्य विभागों में हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ छुट्टियों के आवंटन में पक्षपात किया जाता रहा। हिंदू डॉक्टरों को छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्वों और परिजनों के अंतिम संस्कार तक में छुट्टी मांगने पर अपमानित किया जाता था। इसके विपरीत मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों को नमाज पढ़ने अथवा रिश्तेदारों के निकाह में शामिल होने के लिए आसानी से अवकाश स्वीकृत कर दिया जाता था।
यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव के 12 मामले
एसटीएफ की करीब 10 महीने चली पड़ताल में 12 कथित मामलों का विवरण दर्ज किया गया है। जांच के दायरे में केजीएमयू का गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग शामिल रहे। इन विभागों में कार्यरत महिला डॉक्टरों और महिला कर्मियों ने शारीरिक शोषण, ब्लैकमेलिंग, परीक्षा में फेल करने की धमकी और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू, डॉ. सुमायरा कय्यूम और बायोकेमिस्ट्री विभाग के लैब इंचार्ज डॉ. वाहिद अली की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। जांच में सामने आया कि उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा शिकायतों के निस्तारण में कथित तौर पर पक्षपात किया गया और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास हुआ, जिससे पीड़ित कर्मियों की सुनवाई नहीं हो सकी।
डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक पर लगे गंभीर आरोप
जांच रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नायक पर कई महिला डॉक्टरों के शोषण और मतांतरण का दबाव बनाने का उल्लेख है, जिसमें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले भी शामिल हैं। वहीं गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ नफीस, फुरकान, माइक्रोबायोलॉजी के शफात अली खान और रेडियोलॉजी के डॉ. रिजवान पर महिला कर्मियों को फंसाने, छेड़छाड़ करने और नौकरी से हटवाने से जुड़े आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी रेखांकित है कि इन आरोपों पर न्यायिक स्थिति और संबंधित पक्षों का अंतिम पक्ष आना अभी बाकी है।
एरा मेडिकल कॉलेज और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से जुड़े तार
एसटीएफ की जांच के दौरान कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों के मामलों का भी संदर्भ सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, एरा मेडिकल कॉलेज में पूंजी लगाने, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के फिजियोलॉजी विभाग से जुड़े पुराने मामलों और वर्ष 2013 के दौरान केजीएमयू परिसर में इबादत से जुड़े कुछ पूर्व घटनाक्रमों का उल्लेख भी जांच के बैकग्राउंड में शामिल किया गया है। फिलहाल शासन स्तर पर इस सात पेज की रिपोर्ट के आधार पर आगामी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय लिया जाना है।
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