सौम्या चौरसिया न जाने कितनो का जीवन बर्बाद करेगी, ये प्रश्न चलकर एक महिला डॉक्टर के घर पहुंच गया है। ये डॉ है प्रसूति रोग विशेषज्ञ । खासकर उन महिलाओं के लिए भगवान समान है जिनके बच्चे आसानी से नहीं होते। सौम्या चौरसिया के भी नहीं हो रहे थे। पहले बैंगलोर में सेरोगेसी की बाते सामने आई थी। मामला गोपनीय था कोविड नहीं आता तो संतान प्राप्ति हो जाती। लौट कर बुद्धू घर को आए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विकल्प खोजा गया। हल्ला राजीव भवन के आसपास के अस्पताल का उठा भी था। बहरहाल सौम्या चौरसिया को जुड़वां संतान मिल गए। संतानों के सेरोगेसी को लेकर भी विवाद हुए।कांग्रेस शासन था, माता सौम्या, जो प्रमुख सचिव को नाम लेकर बुलाती थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री की “मेरी उपसचिव” थी कौन आवाज उठाता?
हमारे देश, राज्य शहर में करोड़ो लोग फोकट छाप है ।इनका काम काफी हाउस में बैठकर समय काटना और उन बातों पर समय खर्च करना है जिनसे दिन कटता है। सामाजिक चकल्लस में कई बात आई। जुड़वा संतान की सेरोगेट मदर ने बच्चे वापस मांगे,डीएनए टेस्ट का बवाल हुआ।ये सब चल ही रहा था कि सौम्या चौरसिया केंद्रीय जांच एजेंसी के हाथ धरा गई। कोयला दलाली में सौम्या के हाथ सूर्यकांत तिवारी के साथ साथ काले निकल गए।उस जमाने में नगद पैसा इतना आ रहा था और जांच एजेंसी का डर इतना था कि पैसे रखने के लिए आदमी खोजे गए। डाक्टर भी मिल गए एक नहीं कई है। इनमें से एक नाम डा नीरज पहलाजानी का है। एक करोड़ रुपए लेकर सौम्या चौरसिया के पति नीरज मोदी (भाजपा वाले नहीं,आईपीएल वाले नहीं) को चालीस लाख रुपए वापस करने का मामला है।
मरीज ,डाक्टर को फीस देता है, ये बात समझ में आती है कि मरीज को डाक्टर पैसा दे वह भी किसी और से लेकर ?गले से क्या मुंह से नीचे नहीं उतरती है। सूर्यकांत तिवारी, सौम्या चौरसिया के पेटे डा नीरज पहलाजानी को नगद एक करोड़ रुपए दिया भी होगा तो सूर्यकांत तिवारी सौम्या चौरसिया का रिश्ते में क्या लगता है! ईडी के लिए,” ये रिश्ता क्या कहलाता हैसी समझ में आ गया। फिर डा नीरज पहलाजानी ने सूर्यकांत तिवारी का पैसा नीरज मोदी को क्यो दिया फिर “ये रिश्ता क्या कहलाता है ” का प्रश्न खड़ा हो गया। फिल्मों में इसे “ट्राएंगल” कहा जाता है। डा साहिबा , सुई लगाना जानती है, जटिल प्रक्रिया से मातृत्व, पितृत्व सुख देती है लेकिन ईडी ने डॉक्टर को सुई लगा दिया है। डाक्टर बीमार हो गया है। अब वकील, सीए खोजें जा रहे है।
एक करोड़ रुपए नगद लेना और चालीस लाख रुपए नगद वापस करना आर्थिक अपराध है। बीस हजार से अधिक रकम केवल चेक, एनएफटी से ही लिया जा सकता है। माता लक्ष्मी भले ही हॉस्पिटल का नाम है लेकिन अब माता लक्ष्मी को काला सफेद करने वाले सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया के घेरे में पड़कर नीरज पहलाजानी भी मुसीबत में है। दो सप्ताह बाद देखेंगे आगे क्या होता है, तब तक हाजमोला खाइए।
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