रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने विद्युत उपभोक्ताओं के लिए लागू बिजली बिल हॉफ योजना बंद कर दी है। राज्य में पिछले छह साल तक चली इस योजना से लाखो उपभोक्ता लाभांवित हुए। उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट पर अचानक ग्रहण लग गया। उनके स्थान पर उद्योगों को लोड़ फैक्टर में 25 प्रतिशत की छूट देकर उसकी राशि जनता से लूटा जा रहा है। यह ऐसे नहीं हुआ मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसर सुबोध सिंह के लौटने के बाद उद्याेगों से नए सिरे से चर्चा के बाद उनका लोड़ फैक्टर बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया।
इससे पहले उद्योगों ने उत्पादन और काम बंद करने की चेतावनी दी थी। तब भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्हें उस समय लोड फैक्टर में 10 प्रतिशत की छूट मिल रही थी। भूपेश सरकार के समय उन्हें लोड़ पैक्टर में केवल 8 प्रतिशत की छूट मिलती थी। लोड फैक्टर में जितनी अधिक छूट देंगे पॉवर कंपनी को अधिक घाटा होता है। भूपेश सरकार के समय कंपनी को 3600 करोड़ का घाटा हुआ था। अब 25 प्रतिशत छूट से होने वाले घाटे की पूर्ति के लिए बिजली बिल हॉफ में लगने वाले 150 करोड़ की छूट को बंद कर दिया गया। अफसर शाही को उद्योग जगत ने अपने वश में कर लिया है। अब जनता को साय सरकार खून के आंसू रूला रही है।

आईए जानते हैं लोड फैक्टर का खेल
उद्योगों में हजारों यूनिट बिजली की खपत होती है। उद्योग उसके आधार पर बिजली का लोड तय करते हैं। लोड फैक्टर पद छूट का गणित देखें जाने माना कि कोई उद्योग 1000 यूनिट का लोड़ लेता है। अगर उसने उसमें से 50 से 75 प्रतिशत तक विद्युत खपत करता है तो उसे 50 प्रतिशत से ज्यादा होने पर 1 प्रतिशत और 75 प्रतिशत तक खपत करने पर 25 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। उद्योगों को रुपए से अधिक एक यूनिट का बिल लगता है, लेकिन लोड़ फैक्टर में छूट की वजह से उसे 4.10 पैसे यूनिट के हिसाब से बिल का भुगतान करना होता है। कांग्रेस सरकार में लोड़ फैक्टर 67 से 75 प्रतिशत तक की खपत में 8 प्रतिश छूट मिलती थी।
उद्योगों को 4.10 , आम जनता को 5.10 रुपए
पॉवर कंपनी का नया खेल मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने शुरू किया इसके तहत आम उपभोक्ता को बिजली बिल के साथ 7 प्रतिशत एबीपीएस टैक्स, 10 पैसे प्रति यूनिट शेष, उर्जा टैक्स और 40 रुपए मीटर किराया और 4.10 रूपए प्रतियूनिट की दर से कुल खपत बिजली बिल के साथ जोड़ कर दी जाती है। जो 5.10 रुपए की पड़ती है।
80 प्रतिशत स्टील दूसरे राज्यों को
प्रदेश में संचालित स्टील उद्योगों में कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत स्टील दूसरे राज्यों में खपत होता है। यहां पर केवल 20 प्रतिशत खपत होता है। यानि उद्योगपतियों का जेब भरने के लिए नौकरशाहों ने नया फार्मूला निकाला ताकि उनका भी हला-भला होता रहे। मुख्यमंत्री के पास विभाग जरूर है, पर अफसर इतने हावी है कि आम लोगों की कमर तोड़ने में आगे हैं। वैसे भी सरकारी बंगलों को बिल सरकार भुगतान करती है, उन्हें तो इसका दर्द नहीं होता।

कौन हैं सुबोध सिंह
वैसे बता दें कि सुबोध सिंह केद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पांच साल से अधिक समय तक रहे। वहां पर वे नीट परीक्षा के कर्ता धर्ता थे। जब उसमें धांधली का मामला सामने आया और केंद्र सरकार को पूरे देश में छात्रों का विरोध झेलना पड़ा तब सुबोध सिंह बोरिया बिस्तर बांध का छत्तीसगढ़ वापस आए गए। अब यहां नई पारी की शुरूआत पॉवर कंपनी के साथ कर रहे हैं।
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