कोरबा को राज्य में बिजली आपूर्ति करने वाला प्रतिष्ठित जिले के रूप में जाना जाता है।इस जिले में हीरे को जन्म देने वाला कोयले की खान है। काला पत्थर के नाम से कोयला दुनियां में अपनी कालिमा के लिए प्रसिद्ध है। इस कोयले के लिए कुछ कहावतें भी चर्चित है कि कोयले की दलाली में हाथ काला।
इसी जिले में पिछले कांग्रेस शासनकाल सरकारी संरक्षण में भ्रष्ट्राचार की खदान खोदी गई।जिले में एक महा भ्रष्ट आईएएस अधिकारी रानू साहू की सुनियोजित पोस्टिंग कराई गई। इस काम को अंजाम देने में राज्यस्तर की महिला अधिकारी जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय में उपसचिव बनाया गया था । एक गुप्त सलाहकार सूर्यकांत तिवारी का भी नाम आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग ने डीएमएफ घोटाले में चार्जशीट में बताया है।उद्देश्य था सरकार की हर योजना में षडयंत्र कर भ्रष्टाचार की राशि हथियाना।
कोयले में हर ट्रक कमीशन कर अरबों रुपए हथियाने वाले गैंग को संतोष नहीं हुआ। डीएमएफ राशि में भी हाथ डाल कर चालीस प्रतिशत कमीशनबाजी की गई। दरअसल भ्रष्टाचार में जिले के जिम्मेदार प्रतिनिधियों सहित उनके आदमियों को अनदेखा किया जाना सौम्या चौरसिया, रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी की तिकड़ी को भारी पड़ गया। इनके खिलाफ पुख्ता सबूत भी घर के ही विभीषण ने ही सार्वजनिक किया। जिले के एक मंत्री ने खुले आम कहा था कि रानू साहू जैसी भ्रष्ट कलेक्टर उन्होंने अपने जीवनकाल में नहीं देखा है। मंत्री ने रानू साहू को हटाने की भी मांग की थी।जब भारी पैमाने पर रुपए की पूर्ति हो रही हो तो नक्कारखाने में तूती की आवाज अनदेखी ही किया जाना तय था,और हुआ भी ऐसा।
सौम्या चौरसिया,राज्य में हर भ्रष्टाचार की सेठानी, महारानी, गूंजा बन गई थी। खुद को आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से ऊपर होने के अहम ने आज सौम्या चौरसिया को महिला जेल में स्थाई बंदी बना दिया है। सौम्या चौरसिया और रानू साहू , छत्तीसगढ़ की दो ऐसी महिला है जिनके विरुद्ध केंद्र की जांच एजेंसी सीबीआई ईडी, और इनकम टैक्स विभाग जांच कर रही है। राज्य की आर्थिक अपराध, भ्रष्ट्राचार निवारण विभाग सहित पुलिस विभाग अलग जांच कर रही है। इसके अलावा विभागीय जांच अलग चलेगी।कुल मिलाकर सत्यानाश।
रानू साहू, आईएएस अधिकारी है, जब तक बर्खास्त नहीं हो जाती है,फिलहाल निलंबित चल रही है। सौम्या चौरसिया राज्य स्तरीय सेवा में डिप्टी कलेक्टर चयनित हुई थी, आईएएस में नाम भी आ गया था।चाहती तो अपना केरियर शासकीय सेवा में बना सकती थी। दोनों को धन का चस्का और दलिद्री ऐसी मुंह लगी कि चौबीस घंटे केवल भ्रष्ट्राचार के लिए योजना बनाने और क्रियान्वित करने में लग गई। दोनों ही ये भूल गई कि जिसके भरोसे वे खुद को सुरक्षित मान रही थी वहीं के भितरघातियों ने घोटाले के दस्तावेज जांच एजेंसी तक पहुंचा दिए। खाली कोरबा जिले का डीएमएफ घोटाला 610करोड़ का है।
जांच एजेंसी की माने तो 40 प्रतिशत की कमीशनबाजी होने का प्रमाण जांच एजेंसी ने अदालत को बताया है याने 244 करोड़ रुपए भ्रष्टाचार मंडली ने सकेल लिए। ये भी तय बात है कि इतनी बड़ी रकम अकेले तीन घोटालेबाज रानू साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी हजम नहीं कर सकते, ओकात भी नही है।
माया वारियर और भरोसा कर जेल में सड़ रहे संयुक्त कलेक्टर भरोसा राम ठाकुर, सहित तीन जनपद पंचायत के सीईओ का भी पेट बड़ा नहीं रहा होगा। प्रसाद में चूरा मिला, बड़ा हिस्सा कहां गया? ये प्रश्न जांच एजेंसी के लिए भले ही जांच का होगा लेकिन छत्तीसगढ़ का बच्चा बच्चा जानता है कि कंबल ओढ कर घी पीने वाला कौन है। जनता कोई न्यायालय नहीं है जिसे सबूत की जरूरत पड़े, पब्लिक है सब जानती है।
ये बात जरूर है कि डीएमएफ फंड घोटाले में रानू साहू सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी की स्वामी भक्ति को दाद देनी पड़ेगी जो अपने हिस्से के अपराध के आरोप में जेल में पनियाल दाल सब्जी, मोटा चांवल, कच्ची रोटी सहित रविवार को चना गुड खा कर भी मुंह बंद किए हुए है।असली कमीशनखोर या खोरों का नाम जांच एजेंसी को नहीं बता रही है। रानू साहू, ये तो बता रही होंगी कि हिस्सा सौम्या चौरसिया के पास सूर्यकांत तिवारी ले जाता था। सूर्यकांत तिवारी,बता रहा होगा कि हिस्सा सौम्या चौरसिया को दिया जाता था लेकिन सौम्या चौरसिया किसके लिए काम कर रही थी।
“सर डॉन” कौन है ये बात सबको पता है पर मुहर तो सौम्या चौरसिया को ही लगाना है। स्वामिभक्ति में जेल में रहते डेढ़ साल होने जा रहे है।देर सबेर जमानत मिल भी जाएगी लेकिन जिस गरिमा से रानू साहू छत्तीसगढ़ शासन में सचिव,प्रमुख सचिव बनती और सौम्या चौरसिया कलेक्टर या संचालक सचिव बनती,वह बंटाधार हो चुका है। जेल से डग्गे में बैठकर आना ,रायपुर अदालत के प्रांगण से लेकर सीढ़ी या लिफ्ट में चढ़ कर। न्यायधीश के चैंबर के बाहर की कुर्सी में बैठना और फिर डग्गे में वापस जाना अब सामान्य बात हो गई है।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter