सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाले के तीन आरोपियों को अंतरिम जमानत(पूर्ण जमानत नहीं) दे दिया है। अच्छी बात है बहुत सारे मामलों में से एक मामले में जमानत मिलना। धीरे धीरे सारे मामलों में जमानत मिल जाएगी। देर सबेर जेल से बाहर भी आ जाएंगे। दोनों महिलाओं सहित सूर्य कांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के साथ एक अलग प्रकार की सजा मिली है राज्य बदर की। आमतौर पर अपराधियों को उनके आदतन अपराध करने की प्रवृति के चलते जिला बदर किया जाता है।ये तीनों आरोपी अभी केवल आरोपी है अपराधी नहीं फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने इनको छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का आदेश दिया है।
इसका मतलब ये है कि इनको समीपस्थ राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड अथवा आंध्र प्रदेश में अपना ठिकाना बनाना होगा।।सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में एक बात मानी गई है कि सभी आरोपी प्रभावशाली है और साक्ष्यों को प्रभावित करने के सभी गुण(साम,दाम,दंड भेद) इनमें पांच साल मे भरपूर आ चुका है। अरबों का भ्रष्ट्राचार कर बहुत बड़ी धन राशि का निवेश बेनामी किए हुए है। जेल से बाहर आकर इसका सदुपयोग खुद के लिए करेंगे ये भी तय है। इसी कारण सभी को राज्य से बाहर रहने का आदेश हुआ है।
बीती पराजित कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ये लोग फर्जी केस बनाकर प्रदेश के लोगों को जेल दाखिल करते थे और जेल ट्रांसफर कर समाचार पत्रों में जनसंपर्क संचालनालय के संचालक से दबाव बनवा कर खबर छपवाते थे। आज खुद की स्थिति ये हो गई है कि दो साल से जेल में है। इतने केस लगे है कि सभी में जमानत मिलते मिलते दो तीन साल और लग जाएंगे। सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया तो छोटे स्तर के बड़े घोटालेबाज थे लेकिन रानू साहू तो आईएएस अधिकारी थी।इन दोनो उच्चकों के फेर में आकर भले ही सैकड़ों एकड़ जमीन खरीद ली करोड़ो रुपए भ्रष्ट तरीके से जमा भी कर ली लेकिन आखिर में हुआ क्या।
रानू साहू और सौम्या चौरसिया को अपना मोबाइल गुमाना पड़ा (गुमा नहीं होगा, जांच एजेंसी के हाथ लगने पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल जाता)। घर से भागना पड़ा।अज्ञातवास में रहना पड़ा, बीमार न होते हुए भी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। घोटाले करने के बाद मुंह में मास्क लगाकर अदालत में घूम रही है। बड़ा कष्ट है,जिसके कारण इतना घोटाला किए वो ‘सर डॉन ‘ की हिम्मत नहीं है कि कभी महिला जेल जाकर दिलासा दे सके।बहुत सीमेरी मेरी ‘ कहते घूमते थे सर डॉन, अब मेरी तेरी हो रही है।
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